विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दो टूक कहा, भारत-चीन सीमा पर जैसा बर्ताव होगा, उसका वैसा ही जवाब दिया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और धैर्य ही दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध का आधार हैं। जयशंकर चीन की विदेश नीति और नए युग में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय पर सेंटर फॉर कंटेम्पररी चाइना स्टडीज (सीसीसीएस) के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्वी लद्दाख में 2020 में हुए संघर्ष का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा, बीते सात दशकों से भारत चीन के सात द्विपक्षीय दृष्टिकोण अपनाता आया है। लेकिन बीते कुछ वर्ष गंभीर चुनौती वाले थे। यह संबंधों और एशिया के लिहाज से चुनौती पूर्ण रहे। इसने महाद्वीप के संबंधों और संभावनाओं को प्रभावित करेगा।
जयशंकर ने कहा, मौजूदा गतिरोध के जारी रहने से भारत या चीन को कोई फायदा नहीं होगा। ऐसे में दोनों देशों को अपने संबंधों के बारे में दीर्घकालीन दृष्टिकोण अपनाने की इच्छा ही प्रदर्शित करनी चाहिए। जयशंकर ने कहा, अतीत में भारतीय नीति ने आत्म-संयम का एक उल्लेखनीय स्तर प्रदर्शित किया है। जिससे उम्मीद की गई थी कि दूसरों के पास इसके विकल्पों पर वीटो हो सकता है।
बार-बार यथास्थिति बदलने की कोशिश की गई
सीमा पर यथास्थिति बदलने के चीन की चीन की चालाकी का परोक्ष जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा, समय समय पर झगड़े की भावना से सीमा के समाधान का सवाल उठाया गया है। सच्चाई यह है कि एक पूर्वापेक्षा हमेशा रही है। 2020 में इसका उल्लंघन किया गया था। चीन के साथ अधिक संतुलित और स्थिर संबंध के लिए भारत के पास कई डोमेन व विकल्प हैं।
गलवां संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच तनाव रहा और नई दिल्ली व बीजिंग के बीच स्थितियां आसान नहीं रहीं। जयशंकर ने कहा, लेकिन इन सब के बावजूद यह कोई ऐसा काम नहीं है जिसे दरकिनार किया जा सकता हो। भारत को अपने पड़ोसियों से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
आपसी सम्मान, संवेदनशीलता व हित से ही अच्छे संबंध कायम हो सकते
जयशंकर ने ट्वीट किया, दोनों देशों के बीच सामान्य संबंध कायम रखने के तीन ही आधार हैं। ऐसा सिर्फ आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों को ध्यान रखकर ही संभव है।
हितों की बेहतर समझ ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दी मजबूती
जयशंकर ने एक अन्य ट्वीट में कहा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, गहरे संबंध बनाने और अपने हितों की बेहतर समझ को बढ़ावा देने से भारत मजबूत होता है। हमें और अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार रहना चाहिए, विशेष रूप से हमारी तत्काल परिधि में। जयशंकर ने कहा, मौजूदा दौर में दो व्यापक पैमाने हैं।
पहला, संचयी सीमा संतुलन (सीबीबी) और दूसरा, व्यापक राष्ट्रीय शक्ति (सीएनपी)। संबंधों का कोई भी विश्लेषण करते वक्त महत्वपूर्ण रूप से इन दोनों पर ध्यान देना चाहिए। जयशंकर ने कहा, भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार करना होगा। इसके लिए आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना जरूरी है।