पहला मामला सामने आया
इस तरह का पहला मामला सामने आया है। अब तक कोई भी राजनयिक कहीं भी अपनी ही सरकार की खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने के आरोप में कभी गिरफ्तार नहीं किया गया।
इस तरह फंसी जासूसी के जाल में
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश के मुताबिक माधुरी गुप्ता के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्स हैं। जानकारी के मुताबिक कहा जा रहा है कि माधुरी ने पाकिस्तान को खुफिया सूचनाएं पहुंचाने का काम पहले तो जासूसी सिस्टम और सीनियर अधिकारियों से बदला लेने के चलते शुरू किया था। लेकिन बाद में वह जासूसी के इस जाल में फंस गई और उसे डरा-धमकाकर जासूसी का ये काम कराया जाने लगा।
ऐसा था प्रारंभिक जीवन
माधुरी गुप्ता जेएनयू की छात्रा रह चुकी है। वहां उसने 2000 से 2005 तक मध्यकालीन भारतीय इतिहास की पढ़ाई की और उसी दौरान वह इस्लाम से बहुत ज्यादा प्रभावित हो गईं। उसे उस धर्म से बहुत लगाव हो गया। माधुरी की मां प्रिंसिपल और पिता शिक्षक थे। इससे पहले साल 1970 में उसने डीयू के एंथ्रोलॉजी विभाग से फॉरेंसिक साईंस, क्रिमोलॉजी और क्रिमिनल लॉ की पढ़ाई की थी।
वर्ष 1970 में वह डीयू के एंथ्रोलॉजी विभाग से फोरेंसिक साईंस, क्रमोलॉजी व क्रिमिनल लॉ की पढ़ाई कर चुकी है। माधुरी ने 2003 से 2005 तक स्टडी लीव ली और जेएनयू में इतिहास से एम. फिल कराने के लिए एंरोल कराया। मध्यकालीन भारत में एम-फिल करने के दौरान ही उसे इस्लाम से इस कदर प्यार हो गया था कि वह इस्लाम धर्म की कई बातें मानने लगी थीं। पाक स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात होने के बाद वह उसकी पाक खुफिया विभाग केअधिकारी 60 वर्षीय राणा से हुई थी।