कोरोना वायरस से राहत पाने के लिए हर कोई टीके का इंतजार कर रहा है। सरकार भी टीकाकरण की तैयारियों में जुटी हुई है। ऐसे में देश के स्वास्थ्य कर्मचारियों के आगे भी एक बड़ी चुनौती है। कई राज्य में इस चुनौती का सामना करने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों ने टीका योद्धा की भांति अपनी पहचान बनाई है। गर्भवती महिला और बच्चों को टीका देने के लिए कर्मचारियों ने साइकिल चलाना तक सीखा है।
बिहार व बंगाल के कर्मचारियों ने मिसाल पेश की
हाल ही में महामारी के चलते लॉकडाउन होने से देश में टीकाकरण कार्यक्रम पर बुरा असर पड़ा लेकिन विषम परिस्थिति में भी टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य कर्मचारी डटे रहे। बिहार और पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों ने एक मिसाल भी कायम की है।
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय और यूनिसेफ अगस्त महीने तक 1.2 करोड़ बच्चों का टीकाकरण कर चुके होंगे। यूनिसेफ के प्रमुख योगी डी एचयू नो का कहना है कि लॉकडाउन के चलते टीकाकरण पर काफी असर पड़ा।
इसके बाद 674 कोल्ड चेन हैंडलर्स और 36 कोल्ड चेन तकनीशियन के लिए ब्रिज ट्रेनिंग सेशन चलाया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं के संचार कौशल को बढ़ाया गया ताकि टीके के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा सके। 45 हजार कार्यकर्ताओं को तैयार कर पूर्वोत्तर राज्यों के दुर्गम इलाकों में टीकाकरण के लिए एयर फोर्स की मदद से तैनात किया गया।
पैदल तय किया जर्जर रास्ता
कर्नाटक के लिंगसुगुर ताल्लुक निवासी 60 वर्षीय एएनएम कार्यकर्ताओं नजीता बेगम और बिहार के रामेश्वरम प्रसाद उन दो लाख टीका कार्यकर्ताओं में हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के बाद टीकाकरण अभियान के अपने लक्ष्य को पूरा किया। एक घर भी न छूटे, अपने इस मिशन को पूरा करने के लिए इन्होंने जर्जर रास्तों, नदी, पहाड़ों और जंगलों का रास्ता कभी पैदल तो कभी निजी वाहन के जरिए पूरा किया।
26 वर्षीय प्रसाद ने बताया कि बिहार के बेंतानावाड़ी गांव में टीकाकरण के लिए उन्हें पड़ोस के एक गांव में साइकिल खड़ी करनी पड़ती थी। इसके बाद में आगे का जर्जर रास्ता पैदल तय करते थे और उन्हें नदी भी पार करनी पड़ती थी लेकिन सरकार द्वारा नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को आवश्यक सेवा में शामिल करने के बाद उन्होंने एक दिन भी आराम नहीं किया और अपने काम को अंजाम दिया।
12 टीकाकरण कार्यक्रम को दिया अंजाम
बिहार के औरंगाबाद जिले के नबीनगर ब्लॉक की 50 वर्षीय मुन्नी बाला सुमन ऐसी ही टीका योद्धा हैं, उन्हाेेेंने इसे चुनौती के रूप में लिया और परिवार की सहायता से साइकिल चलाना सीखी और बस निकल पड़ींं टीकाकरण के लिए। मुन्नी बाला सुमन ने अपने क्षेत्र के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले 12 टीकाकरण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।