भाजपा सदस्य बृजलाल की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निवारण के नाम पर लोक सेवकों की ओर से आईपीसी की धारा 353 का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया जाता है।
लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने, हमला करने या आपराधिक रूप से बल का इस्तेमाल करने वाले को दी जाने वाली दो साल की कैद को घटाकर एक साल किए जाने की सिफारिश संसदीय समिति ने की है। कुछ सांसदों ने लोक सेवकों की ओर से इस कानून का व्यापक रूप से दुरुपयोग किए जाने की दलील दी थी।
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भाजपा सदस्य बृजलाल की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की संसद की स्थायी समिति ने तीन प्रस्तावित आपराधिक कानूनों की जांच के बाद यह सिफारिश की है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निवारण के नाम पर लोक सेवकों की ओर से आईपीसी की धारा 353 का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया जाता है। अतीत में ऐसे कई उदाहरण हैं जब धरना या विरोध प्रदर्शनों के दौरान राजनीतिक नेताओं को आईपीसी की इस धारा के तहत परेशान किया गया और गलत तरीके से दोषी ठहराया गया है। इसलिए सजा को कम करने का यह सुझाव दिया जाता है। एजेंसी