वित्तीय घोटाले, पोंजी योजनाएं, साइबर अपराध, वाहन चोरी, जमीन पर कब्जा, पैसे लेकर हत्या करना जैसे अपराधों को प्रस्तावित नए आपराधिक कानून में संगठित अपराध के दायरे में लगाया जाएगा।
वित्तीय घोटाले, साइबर अपराध, कार चोरी को संगठित अपराध के दायरे में लाने के कदम की संसदीय पैनल ने सराहना की है। भाजपा सांसद बृजलाल की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने पाया कि मौजूदा कानून भूमि कब्जा, अनुबंध हत्या, जबरन वसूली के साथ-साथ कई बड़े वित्तीय घोटालों और मानव तस्करी जैसे कई गंभीर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं थे। लेकिन प्रस्तावित नए आपराधिक कानून में दंड के प्रावधान है।
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बात दें प्रमुख वित्तीय घोटाले, पोंजी योजनाएं, साइबर अपराध, वाहन चोरी, जमीन पर कब्जा, पैसे लेकर हत्या करना जैसे अपराधों को प्रस्तावित नए आपराधिक कानून में संगठित अपराध के दायरे में लगाया जाएगा। यदि ऐसे अपराधों के दौरान किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो दोषी को मौत या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी।
भारतीय दंड संहिता की धारा 120(ए) में संगठित अपराध के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं है।संसदीय समिति ने कहा कि यह मूल कानून में एक बहुत प्रभावी वृद्धि होगी। समिति ने यह भी सिफारिश की कि गैंग, माफिया, क्राइम रिंग, गैंग क्रिमिनलिटी, रैकेटियरिंग और गंभीर अपराध जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा सकता है। आपराधिक संगठन को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जा सकता है।
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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस-2023) विधेयक को 11 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए-2023) विधेयकों के साथ लोकसभा में पेश किया गया था। संसदीय पैनल की रिपोर्ट राज्यसभा को सौंपी गई।