देश की ऐतिहासिक विरासतों और धरोहरों से जुड़े कानून- AMASR Act में संशोधन को लेकर संसदीय समिति ने अहम सुझाव दिया है। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान समिति ने सिफारिश की है कि कानून में ऐसे सख्त संशोधन किए जाने चाहिए, जिससे विरासत और धरोहरों के संरक्षण से जुड़े सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सके।
परिवहन, पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के मामलों को देखने वाली स्थायी संसदीय समिति ने कहा, आने वाले संशोधनों में बेहद सख्त कानूनी प्रावधान होने चाहिए, जिनसे सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सके। समिति ने केंद्र की तरफ से संरक्षित स्मारकों और धरोहरों को सहेजने के साथ-साथ अतिक्रमण रोकने लिए समय रहते और तत्परता से कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने का आह्वान भी किया।
धरोहरों को सहेजने से जुड़े कानून में बदलाव पर संसदीय समिति ने अपनी सिफारिश में कहा, अगर सरकारी कर्मचारी स्मारकों के अतिक्रमण रोकने में विफल रहें और अपनी ड्यूटी में लापरवाही करते पाए जाएं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। जिला वन अधिकारी (DFO) को मिली शक्तियों की समीक्षा भी होनी चाहिए। समिति ने कहा कि अतिक्रमण को रोकने के लिए 1972 में बने कानून- वन्यजीव अधिनियम के तहत डीएफओ को जैसी शक्तियां दी गई हैं, वैसे ही अधिकार ASI अधिकारियों को मिलने चाहिए।
समिति ने शीतकालीन सत्र के दौरान 363वीं रिपोर्ट पेश की। बता दें कि AMSAR कानून के तहत पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करती है। प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष (AMSAR) को बचाने के लिए ASI देशभर में काम करती है। वर्तमान में एएसआई 3690 स्मारकों को सहेजने का काम कर रहा है।
समिति ने इस बात पर भी चिंता जाहिर की है कि देशभर में केवल 6.7 फीसद स्मारकों या संग्रहालयों में सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। यानी केंद्रीय स्तर से सहेजे जा रहे 3693 स्मारकों में केवल 248 में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। कुल सात हजार कर्मचारियों को नियुक्त किए जाने की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 2578 सुरक्षाकर्मी ही तैनात हैं। इसका कारण फंड में कमी को बताए जाने पर स्थायी संसदीय समिति ने निराशा प्रकट की।
बता दें कि संस्कृति मंत्रालय एएमएएसआर कानून में संशोधन का विचार कर रहा है। कानूनी प्रावधानों में जरूरी संशोधन पर मंथन कर रही केंद्र सरकार से संसदीय समिति ने कहा है कि ऐतिहासिक महत्व वाले स्मारकों को सहेजने के लिए स्थानीय निकायों को भी और शक्तियां दी जानी चाहिए। समिति ने कहा है कि शक्तियों के साथ इनकी जवाबदेही तय करने का प्रावधान भी कानून में होना चाहिए।