विभिन्न चुनावों में आयोग की मदद के लिए क्षेत्रीय आयुक्तों को नियुक्त का संविधान में प्रावधान है। 1951 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान, मुंबई और पटना में छह महीने के लिए क्षेत्रीय आयुक्त नियुक्त किए गए थे। लेकिन, इसके बाद हुए चुनावों में इस तरह की तैनाती नहीं की गई।
चुनाव आयोग के पास जरूरी जनशक्ति होने की वकालत करते हुए एक संसदीय समिति ने 2024 के लोकसभा चुनावों में आयोग की मदद के लिए क्षेत्रीय आयुक्तों की नियुक्ति पर सरकार और चुनाव आयोग के विचार मांगे हैं।
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विभिन्न चुनावों में आयोग की मदद के लिए क्षेत्रीय आयुक्तों को नियुक्त का संविधान में प्रावधान है। 1951 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान, मुंबई और पटना में छह महीने के लिए क्षेत्रीय आयुक्त नियुक्त किए गए थे। लेकिन, इसके बाद हुए चुनावों में इस तरह की तैनाती नहीं की गई।
केंद्रीय कानून मंत्रालय के विधायी विभाग के की अनुदान व मांगों की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान कानून और कार्मिक मामलों पर स्थायी संसदीय समिति ने उन संवैधानिक प्रावधानों और चुनाव आयोग के उस मशविरे का संज्ञान लिया है, जिसमें कहा गया कि जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति की तरफ से क्षेत्रीय आयुक्तों को नियुक्त किया जा सकता है।
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समिति ने कहा कि देश के पहले आम चुनावों के बाद कभी भी क्षेत्रीय आयुक्तों की नियुक्ति नहीं हुई। इसके पीछे कोई वजह रही होगी, लिहाजा सरकार और चुनाव आयोग इसके बारे में क्या राय रखते हैं यह जानना जरूरी है।