ब्रिटिश शासन के दौरान देश से बाहर ले जाए गए कोहिनूर समेत अन्य सभी धरोहरों को स्वदेश वापस लाने के मामले में संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने सरकार के मौजूदा तौर-तरीकों पर असंतोष जताते हुए कहा है कि इन मूल्यवान वस्तुओं को वापस लाने के लिए ठोस प्रयास की जरूरत है। ऐसे में ब्रिटेन से कोहिनूर को वापस लाने के प्रयास में जुटी सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सांस्कृतिक मंत्रालय की लोकसभा समिति ने सरकार से कहा है कि वह इस मामले में रिपोर्ट पेश होने के तीन माह के भीतर ठोस कदम उठाए। समिति ने कहा है कि मूल्यवान धरोहरों की स्वदेश वापसी के लिए सरकार को कानूनी और राजनयिक दोनों स्तर पर प्रयास करने चाहिए।
समिति ने कहा है कि सरकार को उन वस्तुओं को वापस लाने के भी प्रयास करने चाहिए जो दूसरे देशों के खरीददारों को बेची जा चुकी हैं। साथ ही समिति ने सरकार से देश के अनमोल और दुर्लभ धरोहरों की रक्षा और संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कानून को मजबूत बनाने को कहा है।
वर्तमान में 1972 का बना कानून प्रभावी है। जिसमें समिति ने ढेरों खामियां गिनाई हैं। पुरातत्व के महत्व से जुड़ी जगहों को खोजने के मामले पर भी समिति ने भारतीय पुरातात्विक विभाग के प्रयासों पर असंतोष जताया है। समिति ने पाया है कि पुरातत्व विभाग अपने कुल बजट का महज एक प्रतिशत ही नई जगहों के खोज पर खर्च करता है।