जन्म-मृत्यु पंजीकरण का होगा एकीकृत डाटाबेस
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया। एजेंसी नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जन्म व मृत्यु अधिनियम में संशोधन का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया है। इसके जरिए वह राज्य स्तर पर नागरिकों के जन्म व मृत्यु पंजीकरण के डाटा को राष्ट्रीय स्तर के डाटा से मिलाएगी। इससे कई दूसरे डाटाबेस भी अपडेट हो पाएंगे। लोकसभा में मंगलवार को यह जानकारी गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दी। उन्होंने बताया कि 1969 के इस अधिनियम में संशोधन के लिए 18 अक्तूबर से 2 दिसंबर तक नागरिकों व विशेषज्ञों से टिप्पणियां मांगी गई थीं।
चीन-भूटान सीमा पर तीन साल में घुसपैठ की कोई घटना नहीं : केंद्र
केंद्र सरकार ने दावा किया है कि चीन और भूटान से लगती भारत की सीमा पर पिछले तीन साल में घुसपैठ की कोई घटना नहीं हुई है। लोकसभा में मंगलवार को एक सवाल के जवाब में गृह राज्यमंत्री नीशीथ प्रमाणिक ने ये जानकारी दी। सांसद चिराग पासवान ने पूछा था कि तीन साल में देश की सीमाओं पर घुसपैठ की कितनी घटनाएं हुईं और इनपर सरकार ने क्या कदम उठाया। सवाल के लिखित जवाब में प्रामाणिक ने बताया, इस अवधि में पाकिस्तान से लगी सीमा पर घुसपैठ की 128 घटनाएं हुई हैं, बांग्लादेश सीमा पर 1787, नेपाल सीमा पर 25 और म्यांमार सीमा पर ऐसी 133 घटनाएं हुई हैं।
उन्होंने बताया कि इन सीमा की निगरानी करने वाले बल, दूसरी सरकारी एजेंसियों और राज्य सरकारों के साथ करीबी सहयोग के जरिये इन घटनाओं से कानून के अनुसार निपटते हैं। क्या सरकार का घुसपैठ रोकने के लिए विशेष निगरानी टीम का गठन करने का प्रस्ताव है, सवाल पर प्रमाणिक ने कहा कि सरकारी एजेसियां पहले से ही इनकी निगरानी कर रही हैं और घुसपैठ को काबू में रखने के कदम उठाती हैं।
कॉलेजियम प्रणाली की समीक्षा का आग्रह : सुप्रीम कोर्ट जज के बराबर हो हाईकोर्ट जजों की सेवानिवृत्ति उम्र
लोकसभा में सांसदों ने मंगलवार को अदालतों में लंबित मामले और न्यायपालिका में खाली पदों को भरने का मुद्दा उठाया। सांसदों ने कॉलेजियम प्रणाली की समीक्षा करने का भी आग्रह किया है। सदस्यों ने कहा कि उच्च न्यायालय के जजों की सेवानिवृत्ति आयु को सुप्रीम कोर्ट के जजों के समान की जाए।
हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट जजों की सेवा शर्त संशोधन बिल, 2021 पर चर्चा के दौरान शशि थरूर ने लंबे समय से लंबित मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के असंवेदनशील होने के कई उदाहरण हैं, जब उसने कोरोना महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों के कई आवेदनों को नामंजूर कर दिया। इस कानून को संसद में भारी बहुमत से पास कराया गया था, पर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।