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संसद डायरी: न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं, केंद्र ने राज्यसभा में दी जानकारी

Fri, 06 Dec 2024 05:14 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Parliament Diary: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि हाईकोर्ट के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। जिला न्यायाधीश 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। 
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अर्जुन राम मेघवाल। - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा को बृहस्पतिवार को बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद के कार्यों के लिए संविधान में किसी कूलिंग ऑफ अवधि का कोई उल्लेख नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि हाईकोर्ट के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। जिला न्यायाधीश 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। 
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प्रक्रियाओं का पालन करें सदस्य बिल्ला लगाकर न आएं: बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से नियम एवं प्रक्रियाओं का पालन करने और सदन में बिल्ला लगाकर न आने का आग्रह किया। बिरला ने कहा, आप वरिष्ठ सदस्य हैं। हम नियमों का पालन नहीं करेंगे तो सदन की गरिमा गिरेगी। उनकी इस अपील को कांग्रेस के कुछ सदस्यों की ओर से काले रंग की जैकेट पहनकर सदन में आने की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। 

लेटरल एंट्री से सरकारी विभागों में 63 विशेषज्ञों की नियुक्ति 
केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि लेटरल एंट्री के माध्यम से केंद्र सरकार के कई विभागों में 2019 से 2023 तक 63 विशेषज्ञों की नियुक्ति की गई है। उच्च सदन में लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि इनमें से 35 अनुबंध पर और शेष 28 प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किए गए हैं। 
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डाकघरों को ग्रामीण भारत की रीढ़ बनाना चाहती है सरकार
सरकार ने राज्यसभा में बताया कि राष्ट्रीय बैंकों में औसतन 20 प्रतिशत महिलाओं के खाते हैं, लेकिन भारत के पोस्ट पेमेंट्स बैंक की शुरुआत के बाद उनमें 45 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के खाते खोले गए हैं। संचार राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि डाकघरों को बदल दिया गया है और उन्हें ग्रामीण समुदायों, विशेषकर महिलाओं के वित्तीय समावेशन आधार बना दिया गया है। आईटी आधुनिकीकरण के तहत, सरकार ने 5,700 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और हमने हर डाकिया को एक मोबाइल एटीएम बनाने के लिए 1.4 लाख मोबाइल फोन, 1.4 लाख थर्मल प्रिंटर और 3 लाख बायोमीट्रिक उपकरण दिए हैं ताकि वे हर महिला गृहिणी के दरवाजे तक जा सकें।  

विधायी प्रभाव मूल्यांकन अनिवार्य करने को कानून की योजना नहीं
केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया िक संसद की ओर से पारित अधिनियमों के अधिनियमन के बाद विधायी प्रभाव के मूल्यांकन को अनिवार्य करने वाला कोई कानून लाने की योजना नहीं है। विधायी प्रभाव मूल्यांकन का अर्थ उन प्रभावों के अध्ययन से है जो प्रस्तावित और अधिनियमित कानूनों का समाज पर पड़ता है।
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पीएम मोदी ने हमेशा किसानों को केंद्र में रखा : धनखड़
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव किसानों के मुद्दों को केंद्र में रखा है। सदन की कार्यवाही के दौरान सभापति ने कहा की किसानों के लिए किफायती आवास, सौर ऊर्जा, हर घर में जल से लेकर किसानों के लिए तकनीक तक मुहैया कराने में मौजूदा सरकार तत्परता से जुटी हुई है। इसे देखते हुए ही किसानों की अपेक्षाएं भी स्वाभाविक रूप से बढ़ रही हैं। यह वह समय है, जब किसानों को ऊंचाई पर ले जाने के लिए हर तरफ से कोशिश की जा रही हैं।

सभापति ने कहा इसलिए उन्हें कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान में जो कार्य हो रहे हैं, वह और अधिक गति प्राप्त करेंगे, क्योंकि किसानों की यदि अपेक्षाएं अधिक हैं, तो उपलब्धियां भी ऐतिहासिक हैं। उन्होंने कहा कि हर साल बढ़ रहा उत्पादन किसानों के प्रदर्शन को भी शानदार बना रहा है, और यह राष्ट्र के लिए दूरगामी प्रभाव डालेगा।
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