राज्यसभा में बुधवार को विपक्षी सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया और बाद में सदन से वाकआउट कर दिया। सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न में दो बार स्थगित हुई और दोपहर दो बजे पुनः शुरू हुई। जैसे ही कार्यवाही आगे बढ़ी, विपक्षी सांसदों ने सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए जोरदार नारेबाजी की और बहस कराने की मांग दोहराई। हालांकि, सदन ने इस बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025 पर विचार शुरू किया। इसके विरोध में विपक्षी सदस्य वाकआउट कर गए, जबकि सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलती रही।
झारखंड में नक्सल प्रभावित दो जिले लातेहार और पश्चिम सिंहभूम को केंद्र सरकार ने बीते पांच वर्षों में लगभग 936.50 करोड़ रुपये की सहायता दी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि यह राशि गृह मंत्रालय की तीन योजनाओं यानि सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर स्कीम, स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम और स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम के तहत जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के जरिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, बुनियादी ढांचे को सुधारने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने पर जोर दिया गया है।
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने दंपती के तलाक को दी मंजूरी, कहा- अहंकार छोड़ें, बच्चे की देखभाल करें
असम में बाढ़ का कहर से 32 लोगों की मौत
असम में इस वर्ष बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में जानकारी दी कि राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार 12 अगस्त 2025 तक बाढ़ की वजह से 32 लोगों की जान गई है और 14,269 पशुओं की मौत हुई है। इसके अलावा 39,821 घरों को नुकसान पहुंचा है और 33,965 हेक्टेयर फसली क्षेत्र प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और राज्य सरकार को हर संभव मदद दी जा रही है।
ये भी पढ़ें- 'देश को पुलिस स्टेट बनाने की साजिश', PM-CM और मंत्रियों को हटाने वाले विधेयक पर बोले ओवैसी
पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर क्यो बोले सांसद?
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 2216.7 किमी है, जिसमें से 1647.696 किमी हिस्से पर बाड़ लग चुकी है। अभी 569.004 किमी क्षेत्र में बाड़ और अन्य ढांचागत कार्य शेष हैं। इनमें से 112.780 किमी हिस्सा गैर-व्यवहार्य है, जबकि 456.224 किमी हिस्सा व्यवहार्य है। उन्होंने कहा कि 77.935 किमी भूमि कार्यकारी एजेंसी को सौंप दी गई है। शेष 378.289 किमी भूमि में से 148.971 किमी पर अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है, जबकि 229.318 किमी भूमि विभिन्न चरणों में अधिग्रहण की प्रक्रिया में है।
पांच साल में 1.20 करोड़ से अधिक शिकायतें दर्ज
केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया कि वर्ष 2020 से जुलाई 2025 तक नागरिकों की ओर से विभिन्न सरकारी विभागों के खिलाफ 1.20 करोड़ से अधिक शिकायतें सीपीजीआरएएमएस (CPGRAMS) पोर्टल पर दर्ज की गईं। इस दौरान 1.28 करोड़ शिकायतों का निस्तारण किया गया, जिनमें पूर्व वर्षों की लंबित शिकायतें भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में सुविधा बढ़ाने के लिए सीपीग्राम्स को 5.1 लाख कॉमन सर्विस सेंटर्स से जोड़ा गया है। शिकायतें मुख्यतः ईपीएफओ, आयकर रिफंड, पीएम किसान योजना, बैंकिंग धोखाधड़ी और स्पीड पोस्ट से संबंधित मामलों में आईं। इसके अलावा कर्मचारी समस्याएं, सरकारी योजनाएं, भूमि विवाद, पर्यावरण और पुलिस से जुड़ी शिकायतें भी प्रमुख रहीं।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय पर क्या बोले सांसद
सरकार ने 1 अक्टूबर 2020 से राष्ट्रीय महत्व की संस्था के रूप में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना की है। संसद से पारित अधिनियम के तहत बने इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, आपराधिक न्याय, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तटीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। विश्वविद्यालय का मकसद नागरिक-केंद्रित सेवाओं, महिलाओं, कमजोर वर्गों और अल्पसंख्यकों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मानव संसाधन तैयार करना है, जिनमें बौद्धिक क्षमता, नैतिक प्रतिबद्धता और पेशेवर दक्षता हो।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय ने गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पुडुचेरी में अपने कैंपस स्थापित किए हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ शोध और प्रशिक्षण के लिए कई एमओयू किए हैं। सरकार का कहना है कि यह संस्थान न केवल सुरक्षा क्षेत्र में नए मानक तय करेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने में देश को सक्षम भी बनाएगा।
डीजीसीए में कर्मचारियों की कमी
संसदीय स्थायी समिति ने चेतावनी दी है कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) में कर्मचारियों की भारी कमी देश की विमानन सुरक्षा प्रणाली के लिए गंभीर खतरा है। बुधवार को संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीकृत 1,063 पदों में से लगभग 50 फीसदी खाली हैं और केवल 553 पद ही भरे गए हैं। समिति ने कहा कि इस स्थिति से हवाई सुरक्षा मानकों पर खतरनाक असर पड़ रहा है और सेवा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
समिति ने डीजीसीए को प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता देने की सिफारिश की। रिपोर्ट में कहा गया कि विमानों की संख्या हवाईअड्डों के विकास से कहीं तेजी से बढ़ रही है, जिससे मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव है। समिति ने हवाईअड्डों के विकास को एयरलाइनों के बेड़े विस्तार के साथ तालमेल बिठाने के लिए राष्ट्रीय क्षमता संरेखण योजना बनाने पर जोर दिया। इसके अलावा, हवाई यातायात नियंत्रकों के कार्य घंटे और आराम अवधि को लेकर थकान प्रबंधन प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया गया। समिति की अध्यक्षता जद (यू) नेता संजय कुमार झा कर रहे हैं।