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Parliament Update: सरकार ने 2024-25 तक रक्षा विनिर्माण का लक्ष्य तय किया; कोरवा प्लांट को लेकर कही यह बात

Mon, 13 Mar 2023 05:50 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा, सरकार ने वर्ष 2024-25 तक 1,75,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात सहित 35,000 करोड़ रुपये के रक्षा विनिर्माण का लक्ष्य रखा है।  
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रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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सरकार ने सोमवार को कहा कि उसने 2024-25 तक 35,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात सहित 1,75,000 करोड़ रुपये के रक्षा विनिर्माण का लक्ष्य रखा है। रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि 2021-22 में निजी कंपनियों और राज्य संचालित रक्षा निर्माताओं द्वारा किए गए उत्पादन का मूल्य 86,078 करोड़ रुपये था, जबकि यह राशि 2020-21 में 88,631 करोड़ रुपये और 2019-20 में 63,722 करोड़ रुपये थी।

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उत्पादन मूल्य 2018-19 में  50,499 करोड़ रुपये और 2017-18 में  54,951 करोड़ रुपये था। भट्ट ने कहा, सरकार ने वर्ष 2024-25 तक 1,75,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात सहित 35,000 करोड़ रुपये के रक्षा विनिर्माण का लक्ष्य रखा है। मंत्री ने यह भी कहा कि 2021-22 में रक्षा निर्यात का मूल्य 12,815 करोड़ रुपये था, जबकि चालू वित्त वर्ष में 6 मार्च तक यह 13,398 करोड़ रुपये था।

एक अलग सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण दीर्घकालिक एकीकृत योजना प्रक्रिया पर आधारित एक सतत प्रक्रिया है। भट्ट ने कहा कि वार्षिक अधिग्रहण योजना सेवाओं से इनपुट के आधार पर सालाना तैयार की जाती है और यह पहचाने गए खतरों और अंतर-सेवा प्राथमिकता और उभरती प्रौद्योगिकियों पर आधारित है।
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आईआरआरपीएल कर रहा कलाश्निकोव एके-203 राइफलों का उत्पादन
सरकार ने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों के लिए कलाश्निकोव एके-203 राइफलों का निर्माण और परीक्षण वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कोरवा में भारत और रूस के संयुक्त उद्यम में किया जा रहा है।

रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (आईआरआरपीएल) ने स्वदेशी असॉल्ट राइफलों का उत्पादन शुरू करने के लिए सभी सुविधाएं स्थापित की हैं। आईआरआरपीएल एक संयुक्त उद्यम कंपनी है जिसकी स्थापना एके-203 राइफल्स के स्वदेशी उत्पादन के लिए किया गया है। आईआरआरपीएल ने उत्तर प्रदेश के कोरवा में स्वदेशी असॉल्ट राइफलों का उत्पादन शुरू करने के लिए सभी सुविधाएं स्थापित की हैं।

उन्होंने कहा, 'राइफलों का निर्माण और परीक्षण चरण चल रहा है। भट्ट ने कहा कि एके-203 राइफलों के स्वदेशीकरण से भारतीय रक्षा बलों के लिए असॉल्ट राइफलों के संबंध में आत्मनिर्भरता आएगी। भट्ट ने जिन स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को सूचीबद्ध किया है उनमें 155 मिमी आर्टिलरी गन सिस्टम 'धनुष', लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट 'तेजस', सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम 'आकाश', मुख्य युद्धक टैंक 'अर्जुन', टी-90 टैंक, टी-72 टैंक, चीता हेलीकॉप्टर और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर 'डोर्नियर डो-228' शामिल हैं। 

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रक्षा राज्य मंत्री भट्ट ने कहा कि देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न नीतिगत पहलों का उद्देश्य लंबे समय में आयात पर निर्भरता को कम करना है। उन्होंने कहा, ''विदेशी स्रोतों से रक्षा खरीद पर खर्च 2018-19 में कुल खर्च के 46 फीसदी फीसदी से घटकर दिसंबर, 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार 36.7 फीसदी   हो गया है।

भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के एक हवाई जहाज की खरीद की लागत के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसका खुलासा नहीं किया जा सकता। भट्ट ने कहा, इस मामले में किसी भी जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के लिए मित्र देशों (एफएफसी) के साथ नियमित रूप से बातचीत करता है।
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उन्होंने कहा, एफएफसी के साथ रक्षा औद्योगिक सहयोग का उद्देश्य नई प्रौद्योगिकियों का विकास, अनुसंधान एवं विकास, सह-विकास और सह-उत्पादन, रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना, संयुक्त उद्यमों की स्थापना, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारतीय एमएसएमई और स्टार्टअप का एकीकरण करना है।

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