जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और सरकार के बीच चल रहे टकराव की गूंज बृहस्पतिवार को राज्यसभा में भी सुनाई दी। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि उच्च न्यायपालिका में रिक्तियों और जजों की नियुक्तियों का मुद्दा तब तक लटका रहेगा, जब तक कोई नई व्यवस्था नहीं बन जाती। रिजिजू के जवाब में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को सुप्रीम कोर्ट से रद्द किए जाने की टीस भी दिखी। केंद्रीय मंत्री बोले, यह कहते हुए अच्छा नहीं लग रहा कि देश और सदन की जो भावना थी, उसके हिसाब से हमारे पास व्यवस्था नहीं बनी है। साथ ही कहा, जजों की नियुक्ति पर सरकार के पास सीमित अधिकार हैं।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने लंबित मामलों, न्यायपालिका में नियुक्तियों और छुट्टियाें के अधिकार पर सवाल पूछा था। इस पर रिजिजू ने कहा, प्रश्न गंभीर है। सदन के साथ देश को भी चिंता करने की जरूरत है। लंबित मामलों की संख्या पांच करोड़ होने वाली है। इसका मूल कारण जजों की नियुक्ति न होना है। जजों की संख्या तय क्षमता से कम है। रिक्त पदों को भरने के लिए केंद्र के पास बहुत अधिकार नहीं हैं और उसे कॉलेजियम की ओर से सुझाए नामों पर ही विचार करना होता है। सरकार नए नाम नहीं खोज सकती है।
संविधान और जनता की भावना से चलता है देश
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि देश संविधान और जनता की भावना से चलता है। देश की संप्रभुता लोगों के पास है। सरकार ने पूरी ताकत एवं योजना के साथ कदम उठाए हैं, ताकि लंबित मामलों में कमी आ सके।
संसद की मंजूरी के बाद भी शीर्ष कोर्ट ने रद्द कर दिया था एनजेएसी कानून
विधि मंत्री रिजिजू ने कहा कि 2015 में संसद के दोनों सदनों ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) विधेयक को मंजूरी दी थी। दो तिहाई राज्यों ने भी मंजूरी दी थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने कानून रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि कानून रद्द करने वाली पीठ में शामिल न्यायाधीशों के साथ कई अन्य सेवानिवृत्त जजों व न्यायविदों ने भी कहा है कि कोर्ट का वह फैसला सही नहीं था।
आरक्षण नहीं...पर सभी का प्रतिनिधित्व जरूरी
रिजिजू ने न्यायपालिका में आरक्षण नहीं होने का मुद्दा उठाया। कहा, कैबिनेट में भी आरक्षण नहीं होता है, पर प्रधानमंत्री कैबिनेट बनाते समय प्रयास करते हैं कि विभिन्न वर्गों व क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। कॉलेजियम को भी इस पर गौर करना चाहिए।
देश की विविधता का ध्यान रखें
केंद्रीय मंत्री ने कहा, सरकार नियुक्ति प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन नाम भेजते समय कॉलेजियम को देश की विविधता का भी खयाल रखना चाहिए।
सेवानिवृत्ति के बाद मंत्री से ज्यादा सुविधाएं जजों को
रिजिजू ने कहा, सरकार जजों के कल्याण के बारे में गंभीर है। मंत्री को सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन के अलावा कोई लाभ नहीं मिलता। जजों को कई अन्य लाभ भी मिलते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को सेवानिवृत्ति के बाद एक घरेलू सहायक व एक स्टाफर मिलता है, जो जूनियर कोर्ट अटेंडेंट के समकक्ष होता है। एक सचिवालय सहायक भी मिलता है जो सुप्रीम कोर्ट के ब्रांच ऑफिस के समकक्ष होता है।
- सुप्रीम कोर्ट के जज को घरेलू सहायक व स्टाफर मिलता है। 6 माह के लिए टाइप-7 आवास व 5 साल तक सुरक्षा मिलती है।
20 नाम कॉलेजियम को पुनर्विचार के लिए लौटाए गए: सरकार
सरकार ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए अनुशंसित 20 नामों को उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को वापस भेज दिया है। रिजिजू ने कहा कि 9 दिसंबर तक 1,108 न्यायाधीशों की स्वीकृत शक्ति के मुकाबले 25 उच्च न्यायालयों में 777 कार्यरत थे, जिससे 331 (30 प्रतिशत) पद खाली रह गए। उन्होंने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि वर्तमान में 331 रिक्तियों के खिलाफ विभिन्न उच्च न्यायालयों से प्राप्त 147 प्रस्ताव सरकार और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के बीच प्रसंस्करण के विभिन्न चरणों में थे। 184 रिक्तियों के संबंध में उच्च न्यायालय के कॉलेजियम से और सिफारिशें अभी प्राप्त नहीं हुई हैं।