वडोदरा जिले की सावली सीट कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है क्योंकि पार्टी ने यहां सात चुनाव जीते हैं। हालांकि, बीते तीन चुनावों में इसे हार मिली है। इस सीट पर 1962 में पहली बार चुनाव हुए थे। इस बार भाजपा ने यहां से केतनभाई इनामदार को उतारा था। केतनभाई ने इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार कुलदीपसिंह राउलजी को 36,926 वोटों से हरा दिया।
2017 में यहां भाजपा को जीत मिली
2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में भाजपा ने 2013 में पार्टी ज्वाइन करने वाले केतनभाई महेंद्रभाई इनामदार को टिकट दिया था। पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए केतनभाई इनामदार ने इस चुनाव को जीत लिया। उन्होंने कांग्रेस के सागर प्रकाश ब्रह्मदत्त को 41 हजार वोटों से हराया था।
2017 से पहले 2012 चुनाव में भी इस सीट को केतनभाई महेंद्रभाई इनामदार ने जीता था। हालांकि, उस चुनाव में वो भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर बागी हो गए थे और निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उन्होंने कांग्रेस के सुमन सिंह चौहान को शिकस्त दी थी।
2022 चुनाव के लिए इस सीट पर भाजपा ने मौजूदा विधायक केतनभाई महेंद्रभाई इनामदार को अपना प्रत्याशी बनाया था। वहीं, कांग्रेस ने कुलदीप सिंह राउलजी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। आम आदमी पार्टी ने विजय चावड़ा को मैदान में उतारा था। इस सीट पर पांच दिसंबर को दूसरे चरण में मतदान हुआ था। नतीजे आठ दिसंबर को आए।
2017 में वडोदरा में भाजपा ने जीती थी आठ सीट
सावली सीट, वडोदरा जिले में आने वाली दस विधानसभा सीटों में से एक है। 2017 में जिले की दस में से आठ सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, दो सीटों पर कांग्रेस जीत दर्ज करने में सफल रही थी।
इस चुनाव में क्या रहे गुजरात के नतीजे?
इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर आ गई। मतलब कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, इस बार सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए। एक सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कांधल जडेजा कुटियाना सीट से विजयी हुए। बाकी तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं।