हंगामे की बारिश में कार्यवाही के धुलने की आशंकाओं के बीच आयोजित संसद के बजट सत्र के पहले हिस्से ने सरकार को अपनी पीठ थपथपाने का मौका दे दिया। इस दौरान राज्यसभा में खुद के खिलाफ संशोधन पारित होने से सरकार ने जहां किरकिरी झेली, वहीं तीन अहम बिल पारित कराकर अहम कामयाबी भी हासिल की।
बजट सत्र का पहला हिस्सा शुरू होने से पहले सरकार और विपक्ष कई मुद्दों पर आमने सामने थे। खासतौर पर जेएनयू, दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या का मामला, पठानकोट आतंकी हमला और अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के सवाल पर चरम पर पहुंच चुके सियासी पारे को देखते हुए कामकाज होने की संभावना बहुत कम थी।
हालांकि पहले हिस्से में न केवल संसद में कई अहम मुद्दों पर गरमागरम चर्चा हुई, बल्कि कई बिलों को कानूनी जामा पहनाने का रास्ता भी साफ हुआ।
आर्थिक एजेंडे को छोड़ दें तो इस दौरान सरकार के हिस्से में कामयाबी के साथ-साथ किरकिरी भी आई। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने हरियाणा में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए जोड़ी गई शिक्षा की शर्त पर संशोधन पारित कराकर सरकार की किरकिरी की।
सरकार को जीएसटी सहित आर्थिक सुधार से जुड़े आधा दर्जन बिल पर कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई। हालांकि इस दौरान सरकार ने रियल एस्टेट, आधार बिल को मनी बिल के रूप में पारित कराने के अलावा दो अन्य बिलों, भारतीय मानक ब्यूरो और राष्ट्रीय जलमार्ग बिल को पास करा अहम सफलता भी हासिल की।