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थाने में महिलाओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, चार युवक हिरासत में

Thu, 17 Mar 2016 05:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कंकरखेड़ा (मेरठ)
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महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी देने वाली खाकी कितनी संवेदनहीन हो गई है, इसका प्रत्यक्ष नमूना बुधवार दोपहर कंकरखेड़ा थाने में देखने को मिला। बच्चों के मामूली विवाद में पहले जंगेठी गांव में झगड़ा हुआ और फिर थाने पर तहरीर देने पहुंचीं महिलाओं पर आरोपी युवकों ने हमला बोल दिया।
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थाने में ही महिलाओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, लेकिन पुलिस दबंगों को पकड़ने के बजाए तमाशबीन बनी रही। पुलिस के आगे न आने पर महिलाओं ने खुद ही बचाव में जो कर सकती थीं, किया। हमले में आधा दर्जन महिलाएं घायल हो गईं। चीख पुकार मचने पर थाने के बाहर भीड़ जुटी तो हालात बेकाबू होने पर ही पुलिस जागी।

जंगेठी गांव निवासी प्रवीण कुमार की बेटी प्राकृति (3) पड़ोस में रहने वाले मनोज की पुत्री परी (4) के साथ बुधवार दोपहर घर के बाहर खेल रही थी। इस दौरान दोनों बच्ची किसी बात पर आपस में लड़ पड़ीं। जिसके बाद परी जोर-जोर से रोने लगी। आरोप है कि वहां पहुंची परी की मां ने प्राकृति की पिटाई कर दी। जिसके विरोध में प्रवीन पक्ष की महिलाओं ने झगड़ा करना शुरू कर दिया। गांव में दोनों पक्षों की महिलाओं में जमकर मारपीट हुई।
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महिलाओं पर युवकों ने बोला हमला

उसके बाद दोपहर करीब तीन बजे मनोज पक्ष अपने घर की महिलाओं को लेकर थाने में आरोपी पक्ष के खिलाफ तहरीर देने पहुंच गया। इसकी जानकारी जब प्रवीण पक्ष को हुई तो वह कई युवकों को लेकर थाने पहुंच गया। थाने में जैसे ही दोनों पक्षों का आमना-सामना हुआ तो दोनों ने एक दूसरे को पुलिस की मौजूदगी में ही उल्टा सीधा कहना व गालीगलौज शुरू कर दी।

देखते ही देखते युवकों ने थाने में ही महिलाओं पर हमला बोल दिया। हाथ में जो भी आया, उससे महिलाओं को पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान थाने में भगदड़ मच गई। करीब आधा घंटे तक दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई। महिलाओं ने भी अपने बचाव में युवकों पर ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। हमलावरों को तो कोई चोट नहीं आई, लेकिन मारपीट में मनोज पक्ष से राखी, ममतेश, अलका, सुंदरी, सोनी व एक अन्य बुजुर्ग महिला घायल हो गई।

दरोगा जी तो खिसक लिए

घटना के वक्त थाने में हेड मोहर्रिर, डाक मुंशी, एक सिपाही और संतरी मौजूद था। चर्चा रही कि इस दौरान थाने में मौजूद सब इंस्पेक्टर झगड़ा होते देख चुपचाप वहां से खिसक लिए। थाने से ही सटा सीओ का ऑफिस है, लेकिन वहां से भी कोई बचाव के लिए नहीं आया। नियमों के अनुसार थाने में कोई महिला पुलिसकर्मी भी नहीं थी। जबकि प्रत्येक थाने में एक महिला सब इंस्पेक्टर और दो सिपाहियों की तैनाती है।
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लोगों ने सुनाई खरीखोटी

थाने में चीख पुकार मचने पर आसपास के लोगों का हुजूम जुट गया। लोगों ने भी थाने के अंदर महिलाओं को पिटता देख पुलिस को खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। लोगों की पुलिस से नोकझोंक हो गई। भीड़ में कुछ युवकों में आक्रोश पैदा हो गया।

उसके बाद ही पुलिसकर्मी हरकत में आए और सख्ती दिखाते हुए हमलावरों को काबू में किया। पुलिस ने दोनों पक्षों के मनोज, प्रवीण, राजेंद्र व नीरज को हिरासत में लेकर घायल महिलाओं को जिला अस्पताल भिजवाया। दोनों पक्षों ने एक- दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है।

गायब रहे एसओ और सीओ

थाने में इतना सब कुछ होने के बावजूद न तो एसओ कंकरखेड़ा या सीओ दौराला तुरंत थाने पहुंचे और न ही इसकी जानकारी आला अफसरों को दी गई। शाम को एसओ यादराम यादव का कहना था कि बच्चों के मामूली विवाद में झगड़ा हुआ था। कोई बड़ी बात नहीं है। जांच के बाद दोनों पक्षों पर कार्रवाई की जाएगी।
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