अल्पसंख्यक आयोग, अनुसूचित जाति आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग में चेयरमैन और महत्वपूर्ण पदों के खाली होने पर राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। इस मुद्दे पर प्रमुख विपक्षी दलों के एक साथ विरोध जताने और वेल में आने पर सदन की कार्यवाही चार बार स्थगित हुई। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के बयान के बाद भी विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और हंगामा करते रहे। मंत्री वेंकैया नायडू ने भी इस विषय पर अपनी बात रखनी चाही लेकिन हंगामे के चलते विपक्ष ने उन्हें भी अनसुना कर दिया।
शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सांसद नरेंद्र बुदानिया ने अल्पसंख्यक, पिछड़ा और एससी आयोग जैसे महत्वपूर्ण और संवैधानिक पदों के खाली होने का मामला उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि अल्पसंख्यक आयोग में न तो चेयरमैन है न ही खाली पदों पर सदस्यों की नियुक्ति की गई है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसा किया जा रहा है। सरकार जो संदेश देना चाहती है, प्रजातंत्र के लिए खतरनाक है। अल्पसंख्यक आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की तारीफ की लेकिन सरकार की मंशा शंका जाहिर करते हुए कहा कि सरकार आयोग का तोड़ना चाहती है।
आयोग के पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है
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जवाब में मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग के तहत छह समुदाय के लोग आते हैं। आयोग के पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि दरअसल जैन समुदाय के लोगों ने सरकार से अपील की थी कि उनका प्रतिनिधित्व भी होना चाहिए। इसमें कैबिनेट में फैसला होगा जिसे शीघ्र ही संसद में भी पेश किया जाएगा। इस पर कांग्रेस सांसद अहमद पटेल ने कहा कि चेयरमैन तय करने में कैबिनेट की क्या दिक्कत है।
सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार सुशासन की बात कहती है लेकिन अल्पसंख्यक, एससी और पिछड़ा वर्ग आयोग में चेयरमैन नहीं हैं। इस बीच कांग्रेस, बसपा, सपा, जदयू के सांसद वेल में आ गए ओर नारेबाजी करने लगे। उपसभापति बार बार कहते रहे कि मंत्री के जवाब पर अविश्वास को कोई कारण नहीं है। हंगामा बढ़ने पर 11.35 बजे सदन कुछ देर के लिए स्थगित किया गया।
वेल में हंगामे के बाद सदन दोपहर दो तक स्थगित रहा
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सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बसपा नेता मायावती भी पहुंच गई थीं। उन्होंने भी आयोग के प्रमुख पद खाली होने की बात कही। उपसभापित शून्यकाल का नोटिस सुनने की बात कहते रहे। लेकिन विपक्षी सदस्य एक बार फिर वेल में आए और सदन 12 बजे तक स्थगित हो गया। प्रश्रकाल शुरू होते ही सपा, बसपा, कांग्रेस, जदयू सांसद एक बार फिर वेल में आकर नारे लगाने लगे। सभापति हामिद अंसारी बार-बार कहते रहे, ये क्या कर रहे हैं ये क्या चल रहा है।
विपक्ष सुनने को तैयार नहीं था। सदन फिर 15 मिनट के लिए स्थगित हुआ। सदन शुरू होने पर मंत्री वेंकैया नायडू बोलने के लिए खड़े हुए और दस मिनट मांगने की अपील करने लगे। विपक्षी सदस्य उन्हें सुनने को तैयार नहीं हुए। वेल में हंगामे के बाद सदन दोपहर दो तक स्थगित रहा।