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दिल्ली में दमघोंटू हवा, देश में डीपफेक का डर: संसद की समिति ने क्यों उठाए ये मुद्दे? जानिए

Fri, 06 Nov 2026 08:02 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और डीपफेक के बढ़ते खतरे पर अब संसद की गृह मामलों की समिति चर्चा करेगी। समिति ने पूरे साल के लिए कई अहम मुद्दे तय किए हैं। इनमें पुलिस सुधार, सीमा सुरक्षा, नक्सलवाद, बच्चों के खिलाफ अपराध और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैयारियों जैसे विषय भी शामिल हैं।
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संसद समिति का बड़ा फैसला - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा और डीपफेक के बढ़ते खतरे पर अब संसद में भी चर्चा होगी। गृह मामलों की संसदीय समिति ने इन दोनों मुद्दों को अपनी बैठक के एजेंडे में शामिल किया है। समिति यह भी देखेगी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक का इस्तेमाल देश की सुरक्षा के लिए किस तरह की मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इसके अलावा डिजिटल ठगी के नए तरीकों और उनसे निपटने में सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर भी बात होगी।
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दिल्ली की हवा बिगड़ी, ग्रैप के नियमों पर भी होगी चर्चा
समिति ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण और इससे निपटने के लिए लागू ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के उपायों को भी चर्चा के लिए चुना है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब शुक्रवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-3 के प्रतिबंध लागू कर दिए। गुरुवार शाम चार बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 382 दर्ज किया गया था। यह बेहद खराब श्रेणी में था।

आईआईटीएम पुणे के अनुमान के मुताबिक, छह नवंबर को भी हवा बेहद खराब श्रेणी में रह सकती है। सात से नौ नवंबर के बीच प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। इसके बाद के छह दिनों में भी हवा की गुणवत्ता गंभीर से बेहद खराब श्रेणी में रहने का अनुमान है। ग्रैप के तहत प्रदूषण बढ़ने पर अलग-अलग चरणों में पाबंदियां लगाई जाती हैं। तीसरे चरण में धूल उड़ाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर सख्ती की जाती है।
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डीपफेक से ठगी तक, नई तकनीक के खतरों पर नजर
समिति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक से पैदा होने वाले खतरों पर भी विचार करेगी। इसमें चर्चा होगी कि नकली वीडियो, तस्वीरों और आवाज के जरिए लोगों को कैसे गुमराह किया जा सकता है और इनका इस्तेमाल किस तरह धोखाधड़ी के लिए हो रहा है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ऐसे मामलों से निपटने में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सामने क्या चुनौतियां हैं।

नक्सलवाद, सीमा सुरक्षा और पुलिस सुधार भी एजेंडे में
समिति की बैठकों में वामपंथी उग्रवाद, तटीय सुरक्षा और देश की सीमाओं की सुरक्षा पर भी चर्चा होगी। सीमा पर निगरानी, आधुनिक तकनीक, बुनियादी सुविधाओं और अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल की समीक्षा की जाएगी। पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने, स्मार्ट पुलिसिंग, नए आपराधिक कानूनों को लागू करने और भीड़ को नियंत्रित करने के तरीकों पर भी विचार होगा।

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बच्चों के खिलाफ अपराध और नशे की तस्करी पर भी चर्चा
बच्चों के खिलाफ अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और उस पर रोक लगाने के लिए सरकारी एजेंसियों की तैयारियों को भी समिति ने अपने एजेंडे में रखा है। देश में फॉरेंसिक जांच की सुविधाओं को बेहतर बनाने, जांच की गुणवत्ता बढ़ाने और इस क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा होगी।

सुरक्षा बलों की तैयारियों और जवानों की सुविधाओं पर भी नजर
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कामकाज, आधुनिकीकरण और सुरक्षा संबंधी तैयारियों की समीक्षा भी की जाएगी। इसके साथ ही जवानों की भर्ती, मानव संसाधन प्रबंधन और उनके कल्याण से जुड़े मुद्दे उठेंगे। होमगार्ड की तैनाती, प्रशिक्षण और सुविधाओं पर भी चर्चा होगी।
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समिति लक्षद्वीप में जहाजरानी, आपातकालीन हवाई सेवाओं और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता पर भी विचार करेगी। केंद्रशासित प्रदेशों में विकास, प्रशासन और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के अलावा देश में लॉटरी के नियमन पर भी चर्चा की जाएगी। भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल इस समिति के अध्यक्ष हैं। सितंबर में विभागों से जुड़ी संसदीय स्थायी समितियों का पुनर्गठन किया गया था। इनका कार्यकाल एक साल का होता है।
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