इस योजना को 2019 में शुरू किया गया था। योजना पात्र किसानों हर चार महीने में दो हजार रुपये की तीन समान किस्तों में प्रति वर्ष छह हजार रुपये का वित्तीय लाभ प्रदान करती है। पैसे सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में स्थानांतरित (ट्रांसफर) किए जाते हैं।
केंद्रीय मंत्री मुंडा से पूछा गया कि क्या सरकार की किसानों के लिए वित्तीय लाभ राशि 8,000-12,000 रुपये सालाना करने की योजना है। इस पर उन्होंने कहा, ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने अब तक 15 किस्तों में 11 करोड़ से ज्यादा किसानों को 2.81 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है। उन्होंने बताया कि यह लाभ भूमि-धारक किसानों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रदान किया जाता है।
मुंडा ने यह भी कहा कि पीएम-किसान सम्मान योजना दुनिया की उन योजनाओं में सबसे बड़ी है, जिसे पैसे को सीधे खाते में ट्रांसफर किया जाता है। उन्होंने कहा, एक किसान केंद्रित डिजिटल बुनियादी ढांचे ने बिचौलियों की भागीदारी के बिना देशभर के सभी किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया है। एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि योजना की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में 2,62,45,829 किसानों को पीएम-किसान योजना का लाभ मिला है।
यूएपीए के तहत 5,023 मामले दर्ज
सरकार ने लोकसभा में यह भी बताया कि 2018 से 2022 तक राजद्रोह और राज्य के खिलाफ अपराधों के 701 मामले दर्ज किए गए। गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 5,023 मामले दर्ज किए गए। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में संसद में बताया कि राजद्रोह और राज्य के खिलाफ अपराधों के तहत दर्ज मामलों की संख्या 2022 में घटकर 68 हो गई, जो कि 2021 में 149 थी। इसी तरह यूएपीए के तहत दर्ज मामलों की संख्या 2022 में बढ़कर 1005 हो गई। जो कि 2021 में 814 थी।
मंत्री ने कहा कि इसी अवधि के दौरान 788 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जबकि, 500 लोगों के खिलाफ राजद्रोह और राज्य के खिलाफ अपराधों के मामले में आरोप पत्र दायर किए गए। 131 लोगों को रिहा भी किया गया। राय ने बताया कि यूएपीए के तहत 8,947 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोप पत्रों में 6,503 लोगों के नाम लिए गए। 550 लोगों को बरी भी किया गया।