जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक क्या है?
एक अगस्त को संसद के निचले सदन लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2023 पारित हो गया था। वर्तमान में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के जरिए जन्म और मृत्यु के पंजीकरण किया जाता है। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है। इसका मतलब है कि संसद और राज्य विधानसभाएं दोनों इस विषय पर कानून बनाने के लिए सक्षम हैं। 2019 तक, जन्म के पंजीकरण का राष्ट्रीय स्तर 93 फीसदी था और मृत्यु पंजीकरण 92 फीसदी था। विधि आयोग (2018) ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में विवाह पंजीकरण को शामिल करने की सिफारिश की थी।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2023 पांच दशक से भी ज्यादा पुराने अधिनियम में संशोधन करना चाहता है। इसे 26 जुलाई को संसद के निचले सदन लोकसभा में पेश किया गया था।अब जबकि यह कानून बन गया है तो कई मामलों में जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग अनिवार्य होगा। इससे ऐसे सभी मामलों में किसी व्यक्ति की उम्र और जन्म स्थान निर्धारित करने के लिए इसे एकमात्र मान्य प्रमाण के रूप में माना जाएगा। जन्म प्रमाण पत्र न होने का मतलब यह होगा कि कोई व्यक्ति वोट नहीं दे सकता, या स्कूल में प्रवेश, शादी या सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकता।
कानून लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र एक ऐसा जरूरी दस्तावेज होगा जिसके जरिए सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। नए कानून से देश में जन्म तिथि और जन्म स्थान को साबित करने के लिए तमाम दस्तावेजों को दिखाने से बचा जा सकेगा। किसी भी बच्चे के जन्म के पंजीकरण के लिए अभिभावकों का आधार अनिवार्य होगा। आज के जमाने में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र को ऑनलाइन तरीके से ले सकते हैं जबकि पहले इसकी हार्ड कॉपी ही मिल पाती थी।
गौरतलब है कि इसे पेश करते समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था, 'इस बिल में कोई संदेह नहीं है। हम जनता के लिए अपनी सेवाओं में और देरी नहीं चाहते हैं। एक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के लिए, हम इसे लेकर आए हैं। हमने जनता की राय के लिए मसौदा भी रखा है और हमने सुझावों को शामिल किया है।
मंत्री ने यह भी कहा था कि कानून में 1969 के बाद से संशोधन नहीं किया गया है और तकनीकी प्रगति के साथ कानून को नागरिकों के लिए और अधिक अनुकूल बनाने की आवश्यकता है।
सात कानून आज से हुए लागू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण समेत सात नए कानून शनिवार से लागू हो गए। जो कानून अमल में आए हैं, उनमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2023; डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम, 2023; जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023; जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023; भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2023; राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2023 और अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023 शामिल हैं। संसद के मानसून सत्र में इन कानूनों से संबंधित विधेयक पारित हुए थे।