भाजपा सांसद ने कहा कि साल 1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में सरकार बनी तो शाह आयोग की रिपोर्ट को नष्ट कर दिया गया। लेकिन शाह आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय पुस्तकालय में उपलब्ध है।
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को सरकार से आपातकाल की ज्यादतियों पर तैयार की गई शाह आयोग की रिपोर्ट को सदन पर रखने की संभावना तलाशने को कहा। धनखड़ ने कहा कि शाह आयोग ने लोकतंत्र के सबसे काले दौर की जांच की थी। शाह आयोग की रिपोर्ट 1975 में देश में लागू किए गए आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों से संबंधित है।
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भाजपा सांसद ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा
दरअसल राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान झारखंड से भाजपा सांसद दीपक प्रकाश ने शाह आयोग की रिपोर्ट का मामला उठाया था। इस पर सभापति धनखड़ ने भी समर्थन दिया और कहा कि 'सरकार को (शाह आयोग की) प्रामाणिक रिपोर्ट हासिल करने और सांसदों और आम जनता के फायदे के लिए शाह आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखने की संभावना तलाशनी चाहिए।'
इससे पहले भाजपा सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि साल 1977 में गठित शाह आयोग की 100 बैठकें हुईं और 48 हजार दस्तावेजों का मूल्यांकन किया गया था। 6 अगस्त 1978 को अंतिम रिपोर्ट पेश की गई। यह रिपोर्ट तीन खंडों में प्रकाशित हुई। भाजपा सांसद ने कहा कि साल 1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में सरकार बनी तो शाह आयोग की रिपोर्ट को नष्ट कर दिया गया। लेकिन शाह आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय पुस्तकालय में उपलब्ध है। यह रिपोर्ट आपातकाल के असल तथ्यों को उजागर करेगी।
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सांसदों ने ये मुद्दे भी उठाए
भाजपा सांसद ने मांग की कि शाह आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। राज्यसभा में पश्चिम बंगाल से टीएमसी सांसद सुष्मिता देब ने असम में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार से धन जारी करने की मांग की। वहीं पंजाब से आप सांसद हरभजन सिंह ने तलवारा में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड अस्पताल को पीजीआई संस्थान या फिर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बदलने की मांग की।