‘हमारा मन भी ‘चीटर’ हो सकता है’
आपको जिस चीज में आनंद आए, उसमें रहते हुए पढ़ाई करें। लेकिन यह जरूर खुद ही सोचें कि मैंने जितना समय निवेश किया, उसका परिणाम मिला या नहीं। अगर गणित में 1 घंटे का समय दिया, तो उतने में जो मैं पढ़ना चाहता था, वह पढ़ सका या नहीं? ध्यान रखें कि हमारा मन भी ‘चीटर’ हो सकता है। हमें जो पसंद है, उसकी ओर हमें ले जाएगा, और जो हमारे लिए श्रेयस्कर है, उससे दूर कर देगा।
बिना खेले न कोई खिलता है न खुलता है
नई शिक्षा नीति छात्रों को अपना कौशल विकसित करने में कैसे नए अवसर देगी? - सुमन रानी, (पानीपत में शिक्षिका) व शीला वैष्णवी, मेघालय, कक्षा 9
मोदी : राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलकूद को शिक्षा का हिस्सा बनाया गया। बिना खेले कोई खिल नहीं सकता, न खुल सकता है। टीम स्पीरिट, साहस, प्रतिस्पर्धी को समझने की क्षमता इन्हीं से आती है, इसे शिक्षा से बाहर रखा नहीं जा सकता।
‘पल को जीने की कोशिश कीजिए, याद बन जाएंगे’
स्मरण शक्ति कभी-कभी सभी के लिए समस्या बनती है। आप किसी पल को जीने की कोशिश कीजिए, वह हमेशा के लिए याद रह जाता है। वर्तमान, यह परमात्मा की सबसे बड़ी सौगात है। इसे जो जी पाता है, उसके लिए भविष्य कभी प्रश्न नहीं बनता। स्मरण शक्ति भी इसी से जुड़ी है। बल्कि यह जीवन से भी जुड़ी है, इसे केवल परीक्षा से न जोड़ें।
बच्चों पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ न डालें
छात्र परीक्षा से डरते हैं या मां-पिता व शिक्षकों से? - रोशनी, गाजियाबाद, कक्षा 11, किरनप्रीत कौर, बठिंडा, पंजाब, कक्षा 10
मोदी : बच्चा क्या कर रहा है, अक्सर अभिभावकों को पता नहीं होता। शिक्षक का जोर सिलेबस पूरा करने पर होता है। बच्चे का मन कुछ और करता है। जब तक हम बच्चे की शक्ति, रुचि, प्रवृत्ति, आकांक्षा को जानने का प्रयास नहीं करते, वे लड़खड़ा जाते हैं। उन पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ न डालें।
प्रतियोगिता बिना जीवन कैसा?
केवल किसी परीक्षा के लिए ही तैयारी नहीं करनी चाहिए। हम पूर्ण शिक्षा लेंगे तो परीक्षाएं रुकावट नहीं बनेंगी। परीक्षा के लिए ‘जड़ी-बूटी’ तलाशने के बजाय, खुद को तैयार करें। प्रतियोगिता के बिना जीवन कैसा? प्रतियोगिता होगी तभी आप जीवन में आगे बढ़ेंगे। हमें गर्व करना चाहिए कि हम खुद को स्पर्धाओं में साबित कर रहे हैं।
अपनी निराशा से खुद जूझें, खुद उसे कब्र में दफनाएं, सहानुभूति मांगना बंद करें’
कई बाधाओं के बीच मोटिवेटेड कैसे रहें? परीक्षा में तैयारी की कमी के डर से कैसे जूझें? - वैभव कनौजिया, दिल्ली, कक्षा 10, सुजीत प्रधान, (ओडिशा से अभिभावक), कोमल शर्मा, जयपुर, कक्षा 12 व एरन ईथन, दोहा, कतर, कक्षा 10
मोदी : मोटिवेशन का इंजेक्शन कहां मिलता है? यह सब सोचना गलत है। पता करें कौन सी बात आपका उत्साह खत्म करती है? इसके लिए खुद को जानें, कुछ समय खुद पर नजर रखें। यह भी देखिए कि कौन सी चीजें आपको मोटिवेट करती हैं। जैसे किसी गाने के शब्द आपको प्रेरित कर सकते हैं। कभी भी सहानुभूति पाने की इच्छा न रखें। मैं मुश्किलों, निराशा, उदासीनता से जूझूंगा, जंग करूंगा और उसे कब्र में गाड़ दूंगा, यह भावना विकसित करें। ईश्वर ने हम सभी को कुछ न कुछ चीजें प्रेरणा के लिए दी हैं। डर एक और विषय है, क्या आप खुद की परीक्षा लेते हैं? एक बार री-प्ले करने की आदत बनाएं। क्लास में कुछ सीखा है, तो उसे दोस्तों को सिखाएं, उसने भी सीखें। इससे डर खत्म होगा।