फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परीक्षा पे चर्चा 2022 : बच्चों के सवालों पर पीएम मोदी ने रोचक अंदाज में सुझाए समाधान, बोले- विश्वास पैदा करें और उसे ताकत बनाएं

Sat, 02 Apr 2022 07:09 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

परीक्षा पे चर्चा के दौरान पीएम मोदी की एक ओर जहां गंभीर बातों और सलाहों को ध्यान से सुना वहीं दूसरी ओर उनकी हल्की-फुल्की और मजाकिया बातों पर सभी छात्र और शिक्षकों ने जोर-जोर से ठहाके भी लगाए। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ती बेटियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जल्द ही ऐसा समय भी आएगा कि महिलाओं की जगह पुरुष आरक्षण मांगने लगेंगे।
विज्ञापन
पीएम मोदी की परीक्षा पे चर्चा - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सोशल मीडिया से पढ़ाई में व्यवधान, परिणामों का डर, नंबरों की टेंशन, ऐसे दर्जनों विषय 127 मिनट की ‘परीक्षा पे चर्चा’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने देश के बच्चों ने रखे और मार्गदर्शन मांगा। पीएम ने प्रश्नों का जवाब देते हुए कई रोचक अनुभव साझा किए और बच्चों की हौसला अफजाई की। 
विज्ञापन


पीएम मोदी : एक साथ इतने सवाल सुनकर मुझे ही पैनिक हो रहा है। हमारे मन में भय क्यों होता है? क्या आप पहली बार परीक्षा देने जा रहे हैं? नहीं, आप बहुत परीक्षा दे चुके हैं, इन अनुभवों से परीक्षा-प्रूफ हो चुके हैं। यही विश्वास पैदा करें, इसे ताकत बनाएं। परीक्षा तो आपकी पढ़ाई के समुद्र का आखिरी छोर है, किनारे पर डूबने का डर कैसा?
और पैनिक क्यों?
क्या आपकी तैयारी में कमी है? वैसे अब परीक्षा में ज्यादा समय नहीं है। हो सकता है एक-दो चीजें छूट गई होंगी, लेकिन जो किया है, उसमें अपना आत्मविश्वास भरपूर रखें, बाकी कमियों की इससे पूर्ति करें।
विज्ञापन

सहज रखें दिनचर्या
अपनी दिनचर्या को परीक्षा में सहज रखें। परीक्षा के वक्त अचानक व ज्यादा बदलाव से स्वभाव में बदलाव आएगा। किसी को देखकर या सुनकर ऐसा न करें। वही करें जो अब तक करते आए हैं, उसी में विश्वास रखें।

...आप परीक्षा-प्रूफ हैं
  • घबराहट के बीच परीक्षा की तैयारी कैसे करें? - खुशी जैन, दिल्ली, कक्षा 12
  • अगर अंक अच्छे नहीं आए तो परिवार की निराशा से कैसे निपटें? -ए श्रीधर शर्मा, छत्तीसगढ़ कक्षा 12
  • सिलेबस पूरा और रिवीजन कैसे करें? -केनी पटेल, गुजरात, कक्षा 10
ऑनलाइन को दोष नहीं दें
  • ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान यूट्यूब व सोशल मीडिया के लालच से कैसे बचें? इस लत से बाहर कैसे निकलें? - तरुण एम्बी, (कर्नाटक, कक्षा 11), शाहिद अली, (दिल्ली कैंट, कक्षा 10), कीर्तना नायर (केरल, कक्षा 10) चंद्रचूडेश्वरन (तमिलनाडु में शिक्षक)
पीएम मोदी : खुद से पूछें कि जब आप ऑनलाइन पढ़ते हैं तो क्या सच में पढ़ते हैं या रील्स देखते हैं? ऑनलाइन या ऑफलाइन का दोष नहीं है। क्लास में भी अकसर आपका शरीर क्लासरूम में होता होगा, आंखें भी टीचर की ओर होंगी, लेकिन कान में एक भी बात नहीं जाती होगी, क्योंकि आपका दिमाग कहीं और होगा। माध्यम समस्या नहीं है, मन समस्या है। 
  • पहले गुरुकुल में सब कंठस्थ करना होता था, उस समय श्रवण शक्ति काम आती थी, बिना किताबों के पढ़ते थे। यह बदलाव लगातार चलता रहा है। आज हम डिजिटल गैजेट्स से आसानी व व्यापक रूप में चीजों को पा सकते हैं। टीचर की पढ़ाई चीजों में और चीजें जोड़ सकते हैं। 

‘हमारा मन भी ‘चीटर’ हो सकता है’
आपको जिस चीज में आनंद आए, उसमें रहते हुए पढ़ाई करें। लेकिन यह जरूर खुद ही सोचें कि मैंने जितना समय निवेश किया, उसका परिणाम मिला या नहीं। अगर गणित में 1 घंटे का समय दिया, तो उतने में जो मैं पढ़ना चाहता था, वह पढ़ सका या नहीं? ध्यान रखें कि हमारा मन भी ‘चीटर’ हो सकता है। हमें जो पसंद है, उसकी ओर हमें ले जाएगा, और जो हमारे लिए श्रेयस्कर है, उससे दूर कर देगा।

बिना खेले न कोई खिलता है न खुलता है
नई शिक्षा नीति छात्रों को अपना कौशल विकसित करने में कैसे नए अवसर देगी? - सुमन रानी, (पानीपत में शिक्षिका) व शीला वैष्णवी, मेघालय, कक्षा 9

मोदी : राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलकूद को शिक्षा का हिस्सा बनाया गया। बिना खेले कोई खिल नहीं सकता, न खुल सकता है। टीम स्पीरिट, साहस, प्रतिस्पर्धी को समझने की क्षमता इन्हीं से आती है, इसे शिक्षा से बाहर रखा नहीं जा सकता। 

‘पल को जीने की कोशिश कीजिए, याद बन जाएंगे’
स्मरण शक्ति कभी-कभी सभी के लिए समस्या बनती है। आप किसी पल को जीने की कोशिश कीजिए, वह हमेशा के लिए याद रह जाता है। वर्तमान, यह परमात्मा की सबसे बड़ी सौगात है। इसे जो जी पाता है, उसके लिए भविष्य कभी प्रश्न नहीं बनता। स्मरण शक्ति भी इसी से जुड़ी है। बल्कि यह जीवन से भी जुड़ी है, इसे केवल परीक्षा से न जोड़ें।

बच्चों पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ न डालें
छात्र परीक्षा से डरते हैं या मां-पिता व शिक्षकों से? - रोशनी, गाजियाबाद, कक्षा 11, किरनप्रीत कौर, बठिंडा, पंजाब, कक्षा 10

मोदी : बच्चा क्या कर रहा है, अक्सर अभिभावकों को पता नहीं होता। शिक्षक का जोर सिलेबस पूरा करने पर होता है। बच्चे का मन कुछ और करता है। जब तक हम बच्चे की शक्ति, रुचि, प्रवृत्ति, आकांक्षा को जानने का प्रयास नहीं करते, वे लड़खड़ा जाते हैं। उन पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ न डालें। 

प्रतियोगिता बिना जीवन कैसा?
केवल किसी परीक्षा के लिए ही तैयारी नहीं करनी चाहिए। हम पूर्ण शिक्षा लेंगे तो परीक्षाएं रुकावट नहीं बनेंगी। परीक्षा के लिए ‘जड़ी-बूटी’ तलाशने के बजाय, खुद को तैयार करें। प्रतियोगिता के बिना जीवन कैसा? प्रतियोगिता होगी तभी आप जीवन में आगे बढ़ेंगे। हमें गर्व करना चाहिए कि हम खुद को स्पर्धाओं में साबित कर रहे हैं।
विज्ञापन

अपनी निराशा से खुद जूझें, खुद उसे कब्र में दफनाएं, सहानुभूति मांगना बंद करें’
कई बाधाओं के बीच मोटिवेटेड कैसे रहें? परीक्षा में तैयारी की कमी के डर से कैसे जूझें? - वैभव कनौजिया, दिल्ली, कक्षा 10, सुजीत प्रधान, (ओडिशा से अभिभावक), कोमल शर्मा, जयपुर, कक्षा 12 व एरन ईथन, दोहा, कतर, कक्षा 10

मोदी : मोटिवेशन का इंजेक्शन कहां मिलता है? यह सब सोचना गलत है। पता करें कौन सी बात आपका उत्साह खत्म करती है? इसके लिए खुद को जानें, कुछ समय खुद पर नजर रखें। यह भी देखिए कि कौन सी चीजें आपको मोटिवेट करती हैं। जैसे किसी गाने के शब्द आपको प्रेरित कर सकते हैं। कभी भी सहानुभूति पाने की इच्छा न रखें। मैं मुश्किलों, निराशा, उदासीनता से जूझूंगा, जंग करूंगा और उसे कब्र में गाड़ दूंगा, यह भावना विकसित करें। ईश्वर ने हम सभी को कुछ न कुछ चीजें प्रेरणा के लिए दी हैं। डर एक और विषय है, क्या आप खुद की परीक्षा लेते हैं? एक बार री-प्ले करने की आदत बनाएं। क्लास में कुछ सीखा है, तो उसे दोस्तों को सिखाएं, उसने भी सीखें। इससे डर खत्म होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें