केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। अफसरों और जवानों के बीच दूरी न बढ़े और सामंजस्य बना रहे, इसके लिए कमांडेंट, डीआईजी और उससे ऊपर के अधिकारी न केवल जवानों के साथ बॉर्डर या दूसरे इलाकों में ड्यूटी देंगे, बल्कि उनके संग रात्रि विश्राम भी करेंगे।
यह प्रक्रिया महज एक औपचारिकता न बन जाए, इसके लिए भी प्रावधान किया गया है। कोई अधिकारी जवानों के बीच कितने दिन तक रहता है और उसने कहां पर व किस तरह की पेट्रोलिंग की है, इन सभी बातों का उल्लेख संबंधित अधिकारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में लिखा जाएगा।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों जब अर्धसैनिक बलों के मुख्यालयों का दौरा किया था, तो उनके समक्ष कई तरह की बातें सामने आईं। सीआईएसएफ के साथ अपनी बैठक में गृहमंत्री शाह ने सुझाव दिया कि अफसरों और जवानों के बीच किसी तरह की दूरी नहीं रहनी चाहिए। जवानों की समस्याओं को अविलंब हल किया जाए।
सभी बलों के मुख्यालयों, सेक्टर, जोन या बटालियन स्तर पर जो अफसर तैनात हैं, उन्हें जवानों के साथ कुछ समय बिताना चाहिए। बैठक की मिनट्स में लिखा गया है कि कमांडेंट एवं उच्च स्तर के अधिकारी साल में दो बार जवानों के साथ भोजन करें। इतना ही नहीं, अफसरों को जवानों के साथ ही रात्रि निवास करना होगा।
जिन जवानों के साथ अफसर रहेंगे, उनकी संख्या 50 रहेगी। दूसरे बैच में अलग से पचास जवानों का चयन होगा। सभी अर्धसैनिक बलों से कहा गया कि वे इस बाबत जवानों का चयन और जगह आदि तय करने के लिए मानदंड निर्धारित कर लें। डीआईजी एवं उससे ऊपर की श्रेणी के अधिकारियों को प्रतिवर्ष 30 दिन जवानों के साथ सीमा पर व्यतीत करने होंगे।
इसके लिए भी अलग से एक एसओपी बनाई जाएगी। जवानों को अधिक से अधिक प्रोत्साहन मिले, उनका हौसला बना रहे, इसके लिए ये अधिकारी 10-10 दिन की अवधि के तीन प्रवासों के तहत जवानों के बीच पहुंचेंगे।
इस दौरान ये अधिकारी बॉर्डर या तैनाती के दूसरे इलाकों में जवानों के साथ पेट्रोलिंग करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, बल के अधिकारी दिन और रात में जवानों के साथ गश्त पर निकलेंगे। प्रवास के बाद सभी अधिकारी अपने सीनियर को वहां की एक विस्तृत रिपोर्ट भी पेश करेंगे।