पनामा पेपर्स खुलासे में जिन भारतीयों के नाम सामने आए हैं, उनके बारे में हुई शुरूआती जांच से पता चला है कि 90 फीसदी लोगों ने नियमों के तहत ही काम किया है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि जिन्होंने नियमों के तहत काम नहीं किया है, उनके ऊपर आय कर विभाग समेत विभिन्न सरकारी एजेंसियों का शिकंजा कस रहा है।
सरकार से जुड़े एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक, इस सूची में जिन 500 भारतीयों का नाम आया है, उनमें से 90 फीसदी लोगों ने तो रिजर्व बैंक के लिबरेलाइज्ड रेमिटांस स्कीम (एलआरएस) का लाभ उठाया है। जिन्होंने इस योजना का लाभ नहीं उठाया है, उन पर कार्रवाई होगी। इस सिलसिले में कुछ लोगों को आयकर विभाग की तरफ से नोटिस भेजना शुरू हो गया है। मीडिया में भी ऐसी खबर चल रही है कि अलग-अलग शहरों के करीब 50 लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। इन्हें नोटिस का जवाब देने के लिए महज कुछ दिन का समय दिया गया है।
पनामा पेपर्स खुलासे के बाद ही केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक मल्टी एजेंसी जांच समिति बना दी थी जिसमें विभिन्न एजेंसियों के अलावा रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को भी शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि आयकर विभाग ने इस सूची में शामिल भारतीयों के बारे में प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है।
तभी पता चला है कि इनमें से 90 फीसदी लोगों ने रिजर्व बैंक लिबरेलाइज्ड रिमेटांस स्कीम का लाभ उठाया है। इसलिए वे अब दोषी नहीं ठहराये जा सकते हैं। इससे पहले रघुराम राजन ने भी आगाह किया था कि इस रिपोर्ट पर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि विदेशों में बैंक खाते खोलने के वैध कारण भी होते हैं। इस बार में पूरी जांच होने तक इंतजार किया जाना चाहिए।