सादिक को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 9 मार्च को दिल्ली में 50 किलोग्राम स्यूडोफेड्रिन की जब्ती के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। वह एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग गिरोह से जुड़ा हुआ था।
'मादक पदार्थों से हासिल आय का निवेश किया'
राज्यपाल से मुलाकात के बाद पलानीस्वामी ने राजभवन के बाहर पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सादिक द्रमुक के पदाधिकारी थे और चेन्नई पश्चिम एनआरआई शाखा के उप आयोजक के पद पर थे। एनसीबी के एक अधिकारी की प्रेस कॉन्फ्रेस का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सादिक ने फिल्म निर्माण को वित्तपोषित किया और अवैध मादक पदार्थ के व्यापार से मिलने वाली आय से आतिथ्य उद्योग में निवेश किया।
'द्रमुक के पदाधिकारियों को दिए पैसे'
पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि सादिक ने द्रमुक के पदाधिकारियों को पैसे दिए और सत्तारूढ़ पार्टी के एक नेता से जुड़े ट्रस्ट को चंदा दिया। उन्होंने कहा कि सादिक ने एक फिल्म का वित्तपोषण (फंडिंग) किया था, जिसका निर्देशन द्रमुक परिवार के एक प्रमुख व्यक्ति ने किया था।
'हटाए गए सादिक द्वारा दान सीसीटीवी कैमरे'
अन्नाद्रमुक महासचिव ने आगे पुलिस के साथ सादिक के संबंधों की ओर इशारा करते हुए कहा कि शहर की पुलिस ने सादिक को एक प्रमाणपत्र दिया था, जिसमें उन्होंने नगर आयुक्तालय के तहत आने वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे प्रदान करने के लिए उनकी सराहना की गई थी। जब सादिक एनसीबी की नजर में आए तो पुलिस ने उनके द्वारा दान किए गए कैमरों को हटा दिया और उन्हें नए उपकरणों से बदल दिया।
'इस्तीफा दें मुख्यमंत्री और उनके बेटे'
पलानीस्वामी ने कहा, "अन्नाद्रमुक ने राज्यपाल रवि से अनुरोध किया है कि वह उचित कार्रवाई करें, ताकि अधिकारी सादिक के द्रमुक और पुलिस के साथ कथित संबंध होने के आरोपों की गहन जांच की जा सके।" उन्होंने कहा, "जनता को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि सादिक के साथ कथित संबंधों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देंगे।"