भारत के द्वारा इकट्ठा किए गए सबूत जिसे पाकिस्तान समेत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य प्रमुख देशों के साथ साझा किया गया है, इस बात का खुलासा करते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का अल-कायदा और तालिबान समेत सुन्नी वैश्विक आतंकवादी समूहों के बीच संबंध है।
इस बात को साबित करने के लिए अब सबूत हैं कि अजहर के बड़े भाई इब्राहिम अजहर और छोटे भाई रऊफ असगर ने साल 1999 में भारतीय जेल से बंद हरकत-उल-अंसार के तत्कालीन महासचिव अजहर की रिहाई के लिए इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 का अपहरण किया था, जिसमें कम से कम 150 यात्री सवार थे। इस काम को अंजाम देने में अल कायदा, तालिबान और आईएसआई ने उसकी मदद की थी।
अलकायदा के तत्कालीन प्रमुख ओसामा बिन लादेन और तालिबान के मुल्ला उमर के साथ मसूद अजहर के संबंधों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसे कंधार हवाई अड्डे से बाहर निकालने खुद मुल्ला अख्तर मंसूर पहुंचा था जो बाद में तालिबान का मुखिया बना। बाद में मुल्ला अख्तर मंसूर 21 मई 2016 को अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था।
मसूद अजहर रिहाई के वक्त जम्मू में कोट बलवाल जेल में कैद था। उसे 11 फरवरी 1994 को श्रीनगर के बाहरी इलाके में गिरफ्तार किया गया था, जब वह वली एडम इस्सा के नाम पर एक नकली पुर्तगाली पासपोर्ट पर बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुस आया था।
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने जो साक्ष्य साझा किए हैं उनके अनुसार मसूद अजहर ने कराची के जामिया बिनोरिया में पढ़ाई की। यह मुफ्ती निजामुद्दीन शमजई के संरक्षण में 1980 के दशक में वैश्विक जिहाद की नर्सरी था।
अजहर बाद में मौलाना फजलुर रहमान खलील की अगुवाई वाले हरकत-उल-मुजाहिदीन में शामिल हो गया। उसे अफगानिस्तान में अल कायदा के आतंकी पैदा करने वाले कारखानों में प्रशिक्षण दिया गया, क्योंकि खलील, लादेन और मुल्ला उमर दोनों का बहुत करीबी था।