पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) से कंट्रोल रूम के जरिये फिदायीन घुसपैठियों को घाटी में दाखिल कराने का काम किया जा रहा है। इन आतंकियों को पाक में बैठे आकाओं से रमजान के दौरान भी वारदात को अंजाम देने की छूट दे दी गई है।
जम्मू-कश्मीर के पंपोर में हुए हमले इसी का नतीजा है। सुरक्षा एजेंसियों को मिले इंटरसेप्ट से पीओके में पाक आतंकी संगठन की गतिविधियों और घाटी में उनकी नई योजनाओं के खतरनाक संकेत मिले हैं।
खुफिया एजेंसियों के उच्चपदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि पीओके में कंट्रोल रूम चल रहा है, जिससे घुसपैठियों को सीमा पार कराने में मदद दी जा रही है। इनके इंटरसेप्शन से पता चला है कि इनके पास अक्सर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की जानकारी होती है। यह आईएसआई और पाक सेना की मदद के बिना संभव नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक इस कंट्रोल रूम का ठिकाना जरूरत के मुताबिक बदलता रहता है। इनकी बातचीत से पता चला है कि कंट्रोल रूम का इस्तेमाल लश्कर-ए-ताइबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी संगठनों के आका कर रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि सीमा पार करने से पहले घुसपैठियों से जीपीएस जैसे उपकरण ले लिए जाते हैं। ताकि उनके मारे जाने के बाद सीमा पार से सबूत और उनके घुसपैठ के रास्ते का पता नहीं चल सके।
सूत्रों ने बताया कि पंपोर का हमलावर 15 से 20 मई के बीच करीब 10 अन्य आतंकियों के साथ घाटी में आया था।
एजेंसियों को इसकी भनक थी, लेकिन इनकी सटीक जानकारी नहीं मिल सकी। हमलावर सीमा से कम से कम आठ किलोमीटर भीतर आ कर करीब हफ्ता भर छुपा रहा। इसे घाटी में मौजूद हैंडलर पीओके से मिले आदेश के मुताबिक मदद दे रहे थे। हमले वाले दिन भी वह करीब छह से सात घंटे हथियारों के साथ ऑल्टो में सड़क पर था। लेकिन किसी की नजर उस पर नहीं गई।