महाराष्ट्र के सांगली में 16 अप्रैल, 1970 को जन्मे भारतीय नौसेना के पूर्व कमांडर कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने 3 मार्च, 2016 को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया था। उसका दावा है कि जाधव भारतीय जासूस है और रिसर्च एंड एनालिसीस विंग (रॉ) के लिए काम कर रह था।
गिरफ्तारी के 20 दिन बाद पाकिस्तान ने जाधव के कबूलनामे का एक तथाकथित वीडियो भी जारी किया और साढ़े तीन महीने बाद 10 अप्रैल को फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल की अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई दी।
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भारत का दावा
भारत का दावा है कि जाधव नौसेना से रिटायर होने के बाद इरान के चाबहार में अपना व्यवसाय कर रहे थे और पाकिस्तान ने उन्हें इरान से अगवा कर उन पर जासूसी का आरोप लगाया है। भारत ने जेनेवा समझौते का हवाला देते हुए अपने उच्चायोग के अधिकारियों को जाधव से मिलने देने के लिए पाकिस्तान से कई बार अनुरोध किया। पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त गौतम बंबावाले के अनुसार अब तक पाकिस्तान 13 बार भारत के अनुरोध को ठुकरा चुका है।
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अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फांसी पर लगाई रोक
इसके मद्देनजर भारत ने पाकिस्तान के साथ 17 अप्रैल, 2017 को होने वाली मैरीटाइम वार्ता को रद्द कर दिया। इसके बाद भारत ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने 18 मई को जाधव की फांसी पर रोक लगा दी। इस मामले में अब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जनवरी में सुनवाई होने वाली है।