पाकिस्तान से सटी भारतीय सीमा
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों के भीतर भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई का भय लगातार फैल रहा है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति इमरान खान की भारत द्वारा जवाबी कार्रवाई किए जाने के बाद दी गई चेतावनी ने इस भय को और बढ़ा दिया है। सैन्य सूत्र बताते हैं कि पुलवामा की घटना के बाद से पाकिस्तान के फाइटरजेट, निगरानी उपकरण, सीमा पार की पेट्रेलिंग आदि में काफी तेजी देखी जा रही है।
राजौरी, पुंछ, उड़ी,कुपवाड़ा से सटे निकिआल, कोटली, हजीरा, डुंगी, काहुटा, आलियाबाग, सफैदा, बालकोट तक भारत के साथ तनाव की आशंका का असर साफ देखा जा रहा है। बताते हैं उड़ी में सैन्य छावनी पर हमले के बाद जिस तरह से भारतीय सुरक्षा बलों ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था, उससे सीमा पार लोग किसी बड़ी कार्रवाई का अंदेशा लगा रहे हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल एक पूर्व सैन्य अधिकारी के अनुसार सेना और सुरक्षा बल चुप बैठने वाले नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह की गंभीरता दिखाई है, उससे उन्हें भी अंदाजा है कि कोई बड़ी योजना तैयार हो रही है। लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों के सीआरपीएफ के साझा संवाददाता सम्मेलन को भी पूर्व सैन्य अधिकारी पाकिस्तान और वहां से संचालित आतंकी संगठनों के लिए काफी गंभीर चेतावनी की तरह देख रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने साधी चुप्पी
पुलवामा के बाद भारत क्या करेगा? सवाल लाख टके का है, लेकिन कूटनीति, सैन्य नीति, रणनीति और भारत-पाकिस्तान के बीच की राजनीति को समझने वालों का कहना है कि बहुत कुछ बताया नहीं जाता। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम केवल इतना कह सकते हैं कि कुछ ठोस प्रयास जरूर होगा। आप इंतजार कीजिए।
सूत्र का कहना है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश के भीतर काफी गुस्सा है। इसे सरकार महसूस कर रही है। सीमा पार से सहयोग पाकर भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देने की करतूत को अब से बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने जिस लहजे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बयान आने के बाद जवाब दिया है, संदेश देने के लिए काफी है।