अमर उजाला की पड़ताल में इस वीडियो के संबंध में जो सच्चाई सामने आई वो किसी के लिए भी चौंकाने वाली है। सबसे पहले तो यह वीडियो सही है ही नहीं। इसे एडिट कर के यानी काट-छांट के ऐसा बनाया गया है। यह वीडियो दो अलग-अलग घटना के वीडियो को जोड़कर बनाया गया है। वीडियो में सुनाई दे रही आवाज भी असली नहीं है, बल्कि इसे अलग से डाला गया है।
वीडियो का पहला हिस्सा जिसमें पुलिस लोगों पर लाठीचार्ज करती हुई नजर आ रही है, वह दो साल पुराना है। दरअसल यह वीडियो उस समय का है जब डेरा सच्चा सौदा के मालिक गुरमित राम रहीम सिंह की बलात्कार के मामले में गिरफ्तारी हुई थी और उनके अनुयायी भड़क उठे थे। उसी दौरान हरियाणा के पंचकुला में राम रहीम का समर्थन कर रहे कुछ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठियां बरसाई थीं।
वीडियो का दूसरा हिस्सा जिसमें महिलाएं रो रही हैं वह 2018 की एक घटना का है, जब तेलंगाना में एक सब इंस्पेक्टर ने अपनी पत्नी और सास की पिटाई की थी और उसका वीडियो बनाया गया था।
इन्हीं वीडियो को जोड़-तोड़ कर अब पाकिस्तान की ओर से एक नया वीडियो वायरल किया गया जिसे कश्मीर में हो रहे अत्याचार के नाम से फैलाया जा रहा है। पाकिस्तानी मंत्री सैयद अली हैदर जैदी ने भी इसी फर्जी वीडियो को अपने अकाउंट से शेयर किया है।