पूरी दुनिया में आतंकवाद का निर्यात करने वाला पाकिस्तान चौतरफा दबाव से इतना बेचैन है कि भारत के साथ नियंत्रण रेखा पर लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर अपनी बौखलाहट जाहिर कर रहा है। भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से मिल रहे मुंहतोड़ जवाब से उसकी परेशानी और बढ़ती जा रही है।
एक तरफ अमेरिका ने उसकी 25.5 करोड़ डॉलर (लगभग 17 अरब रुपये) की सहायता पर तब तक रोक लगा दी है जब तक कि वह अपनी धरती पर फल-फूल रहे
आतंकी पनाहगाहों को खत्म नहीं कर देता। दूसरी तरफ चीन को छोड़कर पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय उस पर अनौपचारिक रूप से आतंकी देश का ठप्पा लगा चुका है।
उधर, कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ पिछले एक साल से चल रहे भारतीय सुरक्षा बलों के ऑपरेशन क्लीन अप में 200 से ज्यादा आतंकी मारे जा चुके हैं जिनमें डेढ़ दर्जन से ज्यादा टॉप कमांडर शामिल हैं। 2010 में 270 आतंकियों का सफाया हुआ था। उसके बाद संख्या सबसे ज्यादा है। वर्ष 2016 में 165 और 2015 में 100 आतंकी मारे गए थे।
एनआईए की कार्रवाई से भी मची हलचल
इस बीच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा पिछले साल मई में आतंकी फंडिंग के साथ पाकिस्तान और कश्मीर के अलगाववादियों की साठगांठ को उजागर किए जाने से राज्य के अलगाववादी नेताओं के भारत विरोध की धार कम हुई है। इस मामले में न सिर्फ कश्मीर के बड़े व्यवसायी शिकंजे में फंसे बल्कि शीर्ष अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का दामाद भी गिरफ्तार हुआ।