पाकिस्तान में यह बात आम रही है कि कोई भी सरकार दोबारा से सत्ता में आना चाहती है तो वह भारत पर आरोप लगाना शुरू कर देती है। कश्मीर को लेकर झूठे बयान जारी कराए जाते हैं। घाटी में जो दशहतगर्द या आतंकवादी मारे जाते हैं, उन्हें पाकिस्तान शहीद कहता है। आतंकियों के लिए नौजवान जैसे शब्दों का इस्तेमाल करता है। इस बार भी वही हो रहा है। प्रधानमंत्री इमरान खान, दोबारा से पीएम बनना चाह रहे हैं। आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा को सेवा विस्तार मिल गया है। तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान खुश हो रहा है। उसे लगता है कि इमरान खान, जम्मू कश्मीर में अशांति फैलाकर अपनी जीत सुनिश्चित कर लेंगे, ये मुमकिन नहीं है।
बतौर अनिल गुप्ता, पाकिस्तान गलतफहमी का शिकार है। उसे लगता है कि हक्कानी नेटवर्क, इंडियन मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद, एलईटी, टीआरएफ, तालिबानी लड़ाके और आईएस-खोरासान व दूसरे नए आतंकी संगठनों को कश्मीर में उतारा जाएगा। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद सुरक्षा बलों ने कश्मीर में अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। पहली बात तो यह है कि अगर पाकिस्तान इन्हें बॉर्डर से भारतीय सीमा में धकेलने का प्रयास करता है तो इनका वहीं मारा जाना तय है।
जैश-ए-मोहम्मद के सौ से अधिक सदस्यों को अफगान जेलों से रिहा किया गया है। इसके पीछे आईएसआई का हाथ रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक, यह आतंकी संगठन आईएसआई के इशारे पर अफगान लड़ाकों को अपने साथ ले रहे हैं। इनका मकसद है कि छोटे समूहों में उनकी कश्मीर में घुसपैठ कराई जाए। ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता कहते हैं, ये सब पाकिस्तान के लिए उतना आसान भी नहीं है। हालांकि वह ऐसी कोशिशें पहले भी करता आया है और आगे भी करता रहेगा। अभी जो खतरे पाकिस्तान पर आ सकते हैं, वह उनकी बात ही नहीं कर रहा है।
तालिबानी नेता शहाबुद्दीन दिलवर ने इस बात के लिए पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया है कि उसने 30 लाख अफगान शरणार्थियों को शरण दी है। पाकिस्तान ने भी इसे खूब भुनाया। अभी पाकिस्तान में जो आतंकी संगठन हैं, उन्हें जिहाद के बैनर तले एक साथ लाने का प्रयास हो रहा है। इसमें बहुत से ऐसे कट्टर संगठन भी हैं, जो कल खुद पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। शरिया कानून और जिहाद, ये बातें पाकिस्तान को मुसीबत में डाल सकती हैं। खैर जो भी हो, तालिबान या पाकिस्तान की भारत के खिलाफ कोई भी आतंकी मुहिम नहीं चल सकती। सेना उनका मुकाबला करने में सक्षम है।