आईपीसीएस (शांति और संघर्ष अध्ययन संस्थान) में पाकिस्तान-अफगानिस्तान मामलों के विशेषज्ञ सरल शर्मा का कहना है कि चीन ने पाकिस्तान की ग्वादर सहित कई दूसरी बंदरगाहों पर इतना भारी निवेश कर दिया है कि उसे उइगरों के खिलाफ हो रही ज्यादतियां नजर ही नहीं आती। बल्कि यूं कहिये कि वह सब कुछ देखते हुए भी नजरअंदाज बन जाता है। पाकिस्तान में कई छोटे-छोटे संगठन है जो कभी-कभार चीन के खिलाफ आवाज उठाते हैं, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया उनकी आवाज को दुनिया के सामने नहीं लाता।
चीन में उइगरों के दाढ़ी बढ़ाने, नमाज पढ़ने और यहां तक कि टोपी पहनने पर भी रोक लगा दी गई, लेकिन पाकिस्तान कुछ नहीं बोला। पाकिस्तान को अपने मुस्लिम भाईयों से कोई मतलब नहीं है। उसे तो केवल चीन से आर्थिक और दूसरे क्षेत्रों में मदद लेनी है, वह ले भी रहा है। भारत की ओर से पाकिस्तान को कई बार करारा जवाब दिया गया है। वह यह बात अच्छी तरह जानता है कि आगे भी भारत उसे सबक सिखा सकता है तो इस डर से वह चीन के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाने में लगा रहता है।