पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने एनएसजी में जाने की भारत के प्रयासों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने मंगलवार को पाकिस्तान की संसद में यह बात कही। अजीज ने कहा कि एनएसजी में जाने का पाक का दावा योग्यता और गैर-भेदभाव के आधार पर ज्यादा मजबूत है।
अजीज की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब इसी हफ्ते एनएसजी के 48 देशों की सियोल में बैठक होनी है जिसमें भारत और पाक की सदस्यता की अर्जी पर फैसला हो सकता है। नीति निर्माताओं से अजीज ने कहा कि पाकिस्तान को अलग-थलग नहीं किया गया है और इसकी आधिकारिक विदेश नीति विश्व की नई दशा दिशा के अनुरूप तैयार की गई है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दूसरे देशों के मामलों में दखल न देने की अपनी नीति जारी रखेगा। अजीज ने कहा कि विदेश नीति का आधार उसके नागरिकों और परमाणु हथियारों की सुरक्षा है। एससीओ का पूर्ण सदस्य बनने के बाद पाकिस्तान की राजनीतिक भूमिका भी बढ़ जाएगी।
एनएसजी की सिओल बैठक से पहले बढ़ी गहमागहमी
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सियोल में होने वाली एनएसजी सदस्य देशों की बैठक में भले ही भारत की सदस्यता पर चर्चा न हो, मगर इस बैठक में भारत के दावे पर चर्चा की संभावना बढ़ गई है। अमेरिका और रूस इस मोर्चे में भारत की राह में रोड़ा अटका रहे चीन को कूटनीतिक पहल कर रहा है।
इसके अलावा 24 जून को सिओल में होने वाली बैठक के ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की होने वाली मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। भारत मान कर चल रहा है कि सिओल की बैठक में एनएसजी में शामिल होने के मामले में उसका हाथ पूरी तरह खाली नहीं रहेगा।
भारत को इस बैठक से पहले एनएसजी के कुछ और सदस्य देशों को भी साध लेने की उम्मीद है। इस मामले में चीन के रुख में आई हल्की सी नरमी को भारत की कूटनीतिक पहल की असर के रूप के रूप में भी देखा जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सिओल बैठक से भारत फिलहाल नाउम्मीद नहीं है। बैठक होने में अभी दो दिन शेष हैं। महज 24 घंटे बाद कुछ सकारात्मक बदलाव आए हैं। अब तक की स्थिति यह है कि सिओल की बैठक में भारत के दावे पर चर्चा की संभावना बढ़ गई है। अगर बैठक में दावे पर चर्चा भी हो गई तो यह एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी होगी। क्योंकि इसके बाद भारत एनएसजी के अन्य सदस्य देशों को साधने में जुट जाएगा और इसका असर चीन के भावी रुख पर भी पड़ेगा।
भारत को अमेरिका और रूस से उम्मीदें
भारत की कूटनीतिक पहल का असर दिखने का दावा करते हुए उक्त सूत्र ने बताया कि चीन के रुख में आया बदलाव हालांकि बहुत बड़ा नहीं है, मगर इतना जरूर है कि उसके रुख में लचीलापन दिखाई दे रहा है।
बहरहाल बैठक के दो दिन पूर्व अब भारत की निगाहें गुरूवार को होने वाली पीएम मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर है। इसके अलावा भारत की निगाहें अमेरिका और रूस की ओर से खुद के लिए शुरू की गई कूटनीतिक दांव पर है।
सियोल जा सकते हैं विदेश सचिव
एनएसजी की समग्र बैठक में भारत की की दावेदारी को मजबूत करने के लिए विदेश सचिव एस जयशंकर सियोल की यात्रा कर सकते हैं। एनएसजी के 48 सदस्य देशों की अहम बैठक होने वाली है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, विदेश सचिव परिस्थितियों पर बहुत करीब से निगाह बनाए हुए हैं और बृहस्पतिवार और शुक्रवार को सियोल में होने वाली बैठक से पहले अधिकारी स्तर की बैठक के नतीजे के आधार पर वह सियोल की यात्रा कर सकते हैं। सोमवार से एनएसजी की अधिकारी स्तर की बैठक शुरू हो चुकी है।