पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान वार्ता रुकने की खबरों को खारिज किया है। उसने कहा कि शांति प्रयास जारी हैं और मीडिया रिपोर्ट्स गलत हैं। ईरान ने भी इन खबरों को नकारते हुए बातचीत के लिए तैयार रहने की बात कही है। हालांकि स्पष्ट संकेतों की कमी से प्रक्रिया धीमी है। आइए, इस मामले को विस्तार से जानते हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर आई खबरों पर पाकिस्तान ने बड़ा बयान दिया है। पाकिस्तान ने साफ कहा है कि उसकी मध्यस्थता से चल रही शांति पहल में किसी तरह की रुकावट नहीं आई है। सरकार ने मीडिया में आई उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि बातचीत ठप हो गई है।
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पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन खबरों को “बेबुनियाद” और “कल्पना” करार दिया। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है। पाकिस्तान ने साफ किया कि वह अब भी क्षेत्र में शांति और संवाद को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
क्या अमेरिका-ईरान वार्ता रुक गई है?
पाकिस्तान ने साफ तौर पर कहा कि बातचीत रुकने की खबरें गलत हैं। प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी आधिकारिक स्रोत ने ऐसा नहीं कहा है और मीडिया को सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील हालात में अफवाहें फैलाना स्थिति को और खराब कर सकता है।
क्या ईरान ने भी रिपोर्ट्स को खारिज किया?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इन रिपोर्ट्स को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की जाती है और ईरान ने बातचीत से कभी इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ईरान एक स्थायी और अंतिम समाधान चाहता है।
क्या पाकिस्तान की भूमिका अहम बनी हुई है?
पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करवाया है। हालांकि अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है, लेकिन संपर्क जारी है।
क्या बातचीत में अभी भी रुकावटें हैं?
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ईरान की तरफ से स्पष्ट संकेत नहीं मिलने के कारण बातचीत धीमी हुई है। पाकिस्तान और चीन दोनों ने ईरान से बातचीत में शामिल होने की अपील की है, लेकिन अब तक पूरी सहमति सामने नहीं आई है।
क्या क्षेत्रीय तनाव का असर बढ़ रहा है?
अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल चुका है। इसका असर खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली ऊर्जा सप्लाई पर पड़ा है। ऐसे में पाकिस्तान समेत कई देश तनाव कम करने की कोशिश में जुटे हैं।