पाकिस्तान भी मचा रहा शोर
पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने समेत कई कदम उठाए। पाकिस्तान ने भी 1971 में शिमला समझौते से बाहर निकलने का शोर मचाना शुरू कर दिया। यह पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश है। पड़ोसी देश की काफी समय से कोशिश है कि कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय मध्यस्थता करे। अमेरिका जैसे देश आगे आएं, लेकिन 1971 में हुए शिमला समझौते ने उसके हाथ-पांव बांध रखे हैं। भारत ने हमेशा इस समझौते का हवाला देकर किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता से इनकार किया है। पाकिस्तान के हुक्मरान एक बार इसी कोशिश में हैं। इसके तहत उन्होंने भारत से अपने ऊपर बड़े हमले का खतरा बताया है।
पिछले कुछ दिनों से लगातार चौथी बार मिसाइल परीक्षण का नोटिस दिया है। हालांकि, अभी तक एक भी मिसाइल परीक्षण नहीं किया है। दोनों देशों की नौसेनाएं 85-90 किमी की दूरी पर युद्धाभ्यास की स्थिति में तैनात हैं। सात दिनों से पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन कर रहा है। उसने भी संदेश देते हुए अपने आईएसआई प्रमुख को एनएसए बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव को चरम पर होने का संदेश देने के लिए पाकिस्तान के गृहमंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री समेत अन्य युद्ध जैसे हालात पैदा होने का माहौल बना रहे हैं। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के परमाणु शक्ति संपन्न देश होने का हवाला तक दे रहे हैं। कूटनीति के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर कुटिल चाल चलना शुरू किया है ताकि पहलगाम आतंकी हमले के बहाने, कश्मीर मुद्दे को दोनों देशों के मध्य चौथे युद्ध जैसी स्थिति खड़ी होने के रूप में प्रचारित किया जा सके।
यह भी पढ़ें -
India-Pakistan Tension: भारत की कार्रवाई से खौफ में पाकिस्तान, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से लगाई मदद की गुहार
क्या भिड़ेंगे दोनों देश?
भारत की सैन्य ताकत के मुकाबले पाकिस्तान की क्षमता काफी कम है। उसके पास हवाई हमले से बचने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली का अभाव है। एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है और पनडुब्बी, डिस्ट्रायर, युद्धपोत की क्षमता में भी कमजोर है। भारत के पास किसी भी देश के सैन्य संतुलन को बिगाड़ देने वाली सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल है, लेकिन दोनों देश परमाणु हथियार से संपन्न हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच में तनाव की दशा में पाकिस्तान हमेशा इन हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देता है। पाकिस्तान की परमाणु डॉक्टरिन में परमाणु हथियार को पहले उपयोग करने की नीति स्पष्ट है, जबकि भारत ने अपनी डॉक्टरिन में पहले उपयोग न करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
चीन परोक्ष रूप से और आवश्यकतानुसार अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान का साथ देता है। उपरोक्त को केन्द्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों पर तनाव कम करने और युद्ध जैसी स्थिति से बचने का दबाव बनाता है। दोनों देशों ने कारगिल घुसपैठ के दौरान भी युद्ध की स्थिति से बचने की कोशिश की थी। संसद पर आतंकी हमले के भारत ने ऑपरेशन पराक्रम शुरू किया, लेकिन युद्ध की स्थिति नहीं आई। 2008 और 2016 या इसके बाद भी दोनों देश युद्ध, टकराव से बचे। ऐसे में दोनों देशों में सैन्य संघर्ष अथवा युद्ध जैसी स्थिति की कोई संभावना नहीं है।
यह भी पढ़ें -
India-Pakistan Tension: दहशत में पड़ोसी, भारत से सटी सीमाओं पर पाकिस्तानी सैनिकों के साथ चीन से मिले तोप तैनात
...तो क्या भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान के आतंकी शिविरों पर हमला करेगा?
यह संभव है। भारतीय सैन्य बलों ने नियंत्रण रेखा को पार करके पाक अधिकृत कश्मीर में घोषित तौर पर दो सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकी शिविरों को नष्ट किया है। भारत पिछले कुछ दशक से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का मुखर विरोधी रहा है और आतंकवाद विरोधी लॉबी का महत्वपूर्ण सदस्य है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत लगातार आतंकवाद को नासूर बनाकर इससे पीड़ित होने का अपना दर्द साझा करता है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान अपनी धरती से आतंकवाद को शह देकर भारत के विरुद्ध प्रायोजित करता है। आतंकवाद के सरगना को पाकिस्तान में वहां की सरकार संरक्षण देती है। प्रमाण सहित दस्तावेजों के आधार पर भारत ने पाकिस्तान को न केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरा है, बल्कि उसे मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता को रोकने की अपील भी की है।
इसमें भारत को बड़ी सफलता भी मिली है। ऐसे में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आतंकवाद और आतंकवादियों के विरुद्ध बयान को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्री के नाते अमित शाह ने आक्रामक लहजे और बड़े ही कूटनीतिक तरीके से आतंकवादियों को सख्त सबक सिखाने की बात कही है। इस तरह से भारत एक ठोस रणनीति के साथ मई तीसरे सप्ताह तक आतंकवाद के विरुद्ध सख्त कदम उठा सकता है।