देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र
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पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश का महौल है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए राज्य के छह निवासियों के परिवारों के लिए बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को बताया कि सरकार प्रत्येक परिवार को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी और साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी।
बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में आतंकियों ने अचानक हमला किया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। हमले में मारे गए लोगों में से छह महाराष्ट्र के निवासी थे। इन छह लोगों में तीन ठाणे जिले के डोंबिवली के रहने वाले थे, दो पुणे शहर से थे और एक नवी मुंबई के पनवेल से था।
शोक संतप्त परिवारों के साथ सरकार- सीएम
फडणवीस ने यह जानकारी एक कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन शोक संतप्त परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और हर संभव मदद दी जाएगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने आगे कहा कि यह एक बहुत ही दुखद घटना है और सरकार का प्रयास है कि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जाए ताकि वे इस कठिन समय में थोड़ी राहत पा सकें।
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यूएन में भारत का बयान
उधर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एकजुटता दिखाई है, वह आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलेरेंस का सबूत है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप-स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने कहा कि 'पहलगाम आतंकी हमला, 26/11 के मुंबई हमले के बाद आम नागरिकों पर हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला है। भारत दशकों से सीमापार आतंकवाद का पीड़ित रहा है और हम अच्छी तरह से समझ सकते हैं कि आतंकी घटनाओं का पीड़ितों, परिवारों और समाज पर क्या असर होता है।
पहलगाम आतंकी हमला, एज नजर
पहलगाम में मंगलवार 22 अप्रैल को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी। 26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं, जबकि दो विदेशी और दो स्थानीय नागरिक शामिल हैं।
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टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी
तीन जुलाई से शुरू होने जा रही श्रीअमरनाथ यात्रा से पहले इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। उस हमले में सीआरपीएफ के 47 जवान मारे गए थे।