भगवानदास रैकवार, मध्य प्रदेश
अखाड़ा संस्कृति की प्राचीनतम कला बुंदेली युद्ध शैली के प्रशिक्षक हैं। गुरु रामचरण रावत के निर्देशन में 16-17 साल की उम्र में अखाड़ा खेलना शुरू किया। इसके बाद अखाड़ा को ही जीवन बना लिया।
मोहन नागर, मध्य प्रदेश
पर्यावरणविद नागर जल व भूमि पुनर्स्थापन के लिए जाने जाते हैं। वह 75 हजार से अधिक जल संरचनाएं तैयार कर चुके हैं। 60 एकड़ से अधिक बंजर पहाड़ों को हरा-भरा बनाने में बड़ी भूमिका।
बृज लाल, जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर के रहने वाले बृज लाल भट्ट पूर्व नौकरशाह हैं। वह कश्मीरी पंडितों की वापसी के मुखर आवाज हैं। कश्मीरी लोक संगीत के पुरोधा ने आतंकवाद के दौर में भी साज व आवाज का साथ नहीं छोड़ा। कश्मीरी पंडितों की सांस्कृतिक विरासत को अपनी गायकी से संजोये रखा। उनका मानना है कि कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के लिए व्यापक नीति बनाने की जरूरत है।
शफी शौक, श्रीनगर
श्रीनगर निवासी प्रोफेसर शफी शौक ने कश्मीरी, अंग्रेजी, उर्दू व हिंदी में 100 से अधिक पुस्तकों का लेखन, संपादन और अनुवाद किया है। उनकी किताबों में कश्मीरी डिक्शनरी, कश्मीरी व्याकरण और कश्मीरी भाषा एवं साहित्य का इतिहास विशेष रूप से उल्लेखनीय है। साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारती भाषा सम्मान, साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं।