दुबे ने कहा कि विभिन्न देश जो भारत की तरक्की को पचा नहीं पा रहे हैं, जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। ऐसे में सेबी जैसे महत्वपूर्ण संगठनों को भ्रष्ट बताकर भारत की वित्तीय संरचना और अर्थव्यवस्था पर हमला किया जा रहा है।
लोक लेखा समिति (PAC) के सदस्य और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल पर केंद्र सरकार को बदनाम करने और देश की वित्तीय संरचना और अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने के लिए काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। दुबे ने लोकसभा सभापति ओम बिरला को पत्र लिखकर केसी वेणुगोपाल पर कथित तौर से अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। दरअसल ऐसी खबरें सामने आई हैं कि लोक लेखा समिति समिति सेबी की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच को तलब कर सकती है, जिन पर अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा पेशेवर अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं।
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पीएसी ने सेबी प्रमुख को भेजा समन
भाजपा सांसद ने बीती 9 सितंबर को लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखा था, जिसमें केसी वेणुगोपाल पर असंवैधानिक और अपमानजनक आचरण करने का आरोप लगाया था। के खिलाफ बिरला को पत्र लिखा था। पीएसी ने सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच को 24 अक्टूबर को गवाही के लिए बुलाया है। भाजपा सांसद ने पत्र में दावा किया कि लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस को विपक्ष में बैठने के लिए मजबूर किया, लेकिन कांग्रेस नेता और समिति के अध्यक्ष राजनीति के तहत काम कर रहे हैं। भाजपा सांसद के आरोपों पर अभी तक कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दुबे पर भारत की आर्थिक तरक्की पर हमले के लगाए आरोप
दुबे ने कहा कि विभिन्न देश जो भारत की तरक्की को पचा नहीं पा रहे हैं, जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। ऐसे में सेबी जैसे महत्वपूर्ण संगठनों को भ्रष्ट बताकर भारत की वित्तीय संरचना और अर्थव्यवस्था पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हिंडनबर्ग जैसी विदेशी कंपनी द्वारा बुच के खिलाफ लगाए गए अपुष्ट आरोप भारत को बदनाम करने की टूलकिट का हिस्सा थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इस टूलकिट का 'भारत चैप्टर' सक्रिय हो गया है।
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भाजपा सांसद ने नियमों का हवाला देते हुए लिखा कि लोक लेखा समिति का एकमात्र कार्य भारत सरकार के विनियोग खातों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों की जांच करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति को कुछ देशों के 'टूल किट' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक के दौरान भारत की तेज तरक्की के खिलाफ है।