पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री जनधन योजना को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। चिदंबरम का कहना है कि नोटबंदी के दौरान जनधन खातों का इस्तेमाल कालाधन खपाने में किया गया है। सच भारत-2 तहत इस योजना की सच्चाई एक और जुमला है।
चिदंबरम ने कहा कि अब साफ हो गया है कि जनधन खातों का इस्तेमाल नोटबंदी के बाद कालेधन को खपाने के लिए किया गया। आठ नवंबर 2016 से 30 दिसंबर 2016 के बीच 42187 करोड़ रुपए जनधन खातों में जमा की गई। पहले वित्त मंत्री ने कहा संदिग्ध खातों में पैसा जमा कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे लेकिन वित्त सचिव ने कुछ समय बाद कहा कि कार्रवाई नहीं की जाएगी, इसमें बहुत अधिक समय लगेगा।अकेले यूनाइटेड में 11, 80,000 जनधन खाते हैं, जिसमें एक लाख से अधिक तथाकथित बचत राशि जमा की गई है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जनधन खातों को गरीबों के लिए खोलने की बात है लेकिन एक महीने में सिर्फ चार बार धन निकाल सकते हैं पांचवीं बार में फीस चुकानी पड़ती है। गरीब और मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। बीस प्रतिशत खाते खोलने में बिचौलियों ने पैसे लिए थे।
15 अप्रैल 2014 से जनवरी 2015 तक खाता खुलवाने वालों को जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा सुविधा तो दी गई लेकिन उसके बाद खाता खुलवाने वालों को सुविधा नहीं मिल रही है। सरकार ये भी नहीं बता पा रही कि अब तक कितने खाताधारकों को योजना का लाभ मिला है।
पूर्व वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (बीएसबीडीए) योजना का नाम बदलकर जनधन योजना रखा। सरकार जानबूझकर इस योजना के तहत 2014 से पहले खोले गए 25 करोड़ खातों का जिक्र करना भूल जाती है। आंकड़ों को देखें तो यूपीए सरकार में शून्य बैलेंस के कहीं अधिक खाते खोले गए। वित्त मंत्रालय के अनुसार 6.1 करोड़ जनधन खाते अर्थात पांच में से एक खाता निष्क्रिय है।