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एयरसेल-मैक्सिस मामला: सीबीआई दफ्तर पहुंचे पी चिदंबरम, होगी पूछताछ

Wed, 06 Jun 2018 11:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पी चिदंबरम
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम एयरसेल-मैक्सिस के सिलसिले में दिल्ली स्थित सीबीआई के दफ्तर पहुंच गए हैं। इससे पहले मंगलवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एयरसेल मैक्सिस मनी लांड्रिंग भ्रष्टाचार मामले में उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक को दस जुलाई तक बढ़ा दिया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर जवाब देने के लिये एक माह का समय मांगा है। इसके बाद कोर्ट ने चिदंबरम की गिरफ्तारी रोक की अवधि अगली तारीख तक बढ़ा दी थी।

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पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी के समक्ष पेश प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से अधिवक्ता सोनिया माथुर व नितेश राणा ने चिदंबरम की याचिका पर विस्तृत जवाब देने के लिये चार सप्ताह का समय मांगा था। इससे पूर्व कोर्ट ने पी. चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर 30 मई को एजेंसी को नोटिस जारी कर पांच जून तक जवाब देने का निर्देश दिया था। कोर्ट के समक्ष चिदंबरम की ओर से पेश हुये वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और प्रमोद दुबे ने कहा था कि मामले की सुनवाई के लिये दस जुलाई की तारीख तय कर दी जाये क्योंकि उस दिन कार्ति चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई होगी। 

कार्ति की गिरफ्तारी पर दस जुलाई तक पहले से ही रोक लगी हुई है। अदालत ने उनके तर्क को स्वीकार करते हुए पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी पर रोक के अंतरिम आदेश को 10 जुलाई तक बढ़ा दिया था। कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर पी. चिदंबरम ने कहा कि एयरसेल मैक्सिस मामले में ज्यादातर साक्ष्य दस्तावेजी हैं और सब पहले से सरकार व एजेंसी के पास हैं। इसलिये उन्हें गिरफ्तार कर हिरासत में पूछताछ करने का कोई औचित्य नहीं है। वह एजेंसी के साथ सहयोग करने और जांच में शामिल करने के लिये तैयार हैं।
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एयरसेल मैक्सिस व आईएनएक्स मीडिया घूस मामले में सीबीआई 2011 व ईडी ने 2012 में विदेशी निवेश की अनुमति विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एफआईपीबी) से दिलाने में चिदंबरम की भूमिका की जांच कर रही है। इन कंपनियों को यह अनुमति चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुये 2006 में मिली थी। ईडी का कहना है कि चिदंबरम को 600 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार था। इससे ज्यादा के लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की मंजूरी की जरूरत थी।
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