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NHAA: 2021 से एससी-एसटी अत्याचार हेल्पलाइन पर आए साढ़े छह लाख से अधिक फोन; इस राज्य से सबसे ज्यादा किए गए कॉल

Sat, 10 May 2025 02:33 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एससी-एसटी अत्याचार हेल्पलाइन प्रणाली जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को स्वचालित अनुस्मारक और अनुपालन अलर्ट भेजने के लिए भी डिजाइन की गई है और इसका उद्देश्य एससी/एसटी अधिनियम और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 दोनों के तहत कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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दिसंबर 2021 में हेल्पलाइन शुरू होने के बाद से एससी और एसटी के खिलाफ अत्याचारों के संबंध में राष्ट्रीय अत्याचार निवारण हेल्पलाइन (एनएचएए) को साढ़े छह लाख से ज्यादा फोन किए गए हैं। वहीं आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि इसमें से लगभग आधे फोन अकेले उत्तर प्रदेश से किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, एनएचएए के पास फोन के जरिए 7 हजार 135 शिकायतें आधिकारिक रूप से दर्ज की गईं और 4 हजार 314 का समाधान किया गया।
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क्या है राष्ट्रीय अत्याचार निवारण हेल्पलाइन?
अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के सदस्यों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह हेल्पलाइन हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में चौबीसों घंटे काम करती है, ताकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का उचित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। इन शिकायतों में मारपीट, सामाजिक बहिष्कार, जाति-आधारित दुर्व्यवहार, भूमि हड़पने और सार्वजनिक स्थानों पर जाने से मना करने से लेकर अत्याचार के मामलों में पुलिस की निष्क्रियता के आरोप तक शामिल हैं।

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कैसे मिलती है मदद?
मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हेल्पलाइन पर आने वाले कई फोन पूछताछ, कानूनी मार्गदर्शन के अनुरोध या शिकायतों के रूप में औपचारिक रूप से दर्ज किए जाने के लिए पर्याप्त विवरण की कमी वाली रिपोर्ट से जुड़ी होती हैं। केवल वे फोन जो एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अत्याचार की विशिष्ट घटनाओं से संबंधित होती हैं और कानूनी कार्रवाई के मानदंडों को पूरा करती हैं, उन्हें आधिकारिक शिकायतों में बदला जाता है।' 

किस राज्य से आई कितनी शिकायतें?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, अकेले उत्तर प्रदेश में 3,33,516 कॉल आए, जिनमें से 1,825 औपचारिक रूप से शिकायतों के रूप में पंजीकृत किए गए और 1,515 का समाधान किया गया। इसके बाद बिहार में 58,112 कॉल आए, जिनमें 718 शिकायतें दर्ज की गईं और 707 का समाधान किया गया। राजस्थान में 38,570 कॉल और 750 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 506 का समाधान किया गया। महाराष्ट्र में 268 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन उनका कोई समाधान नहीं हुआ, जबकि गोवा में केवल एक शिकायत दर्ज की गई और उसका कोई समाधान नहीं हुआ।

अन्य राज्यों का कैसा है हाल?
मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली, हरियाणा और कर्नाटक में भी कॉल की संख्या में खासी बढ़ोतरी देखी गई, जहां शिकायत पंजीकरण और निवारण का स्तर अलग-अलग रहा। जैसे कि, मध्य प्रदेश में 1,630 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन केवल 282 का समाधान किया गया। इसके उलट, हरियाणा ने उच्च समाधान दर दिखाई, जहां उसे प्राप्त 392 शिकायतों में से 379 का समाधान किया गया।
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पोर्टल और मोबाइल एप पर काम करता है एनएचएए
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार की तरफ से 2021 में शुरू की गई यह हेल्पलाइन जाति आधारित अत्याचारों पर अंकुश लगाने और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयास का हिस्सा है। एनएचएए एक वेब-आधारित पोर्टल और मोबाइल एप के रूप में भी काम करता है। यह शिकायत ट्रैकिंग, फीडबैक और राज्य-स्तरीय प्रदर्शन के लिए डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। प्रत्येक शिकायत को एक डॉकेट नंबर दिया जाता है, और अधिकारियों को कानूनी समयसीमा के अनुसार एफआईआर पंजीकरण, राहत प्रावधान और समय पर अभियोजन के लिए अनुवर्ती कार्रवाई करने का आदेश दिया जाता है।

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