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उपभोक्ता के खिलाफ हर एक गैरकानूनी गतिविध खत्म करना मकसद: रामविलास पासवान

Mon, 25 Jun 2018 08:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों का मंत्रालय हर पल बदलते बाजारीकरण के दौर में कंपनियों के खेल पर लगाम, उपभोक्ता हितों के संरक्षण और छूट पर खाद्य मुहैया कराने की सहूलियतों पर काम कर रहा है। हॉलमार्किंग, बड़े अक्षरों में एक्सपायरी, दोहरी एमआरपी और पीडीएस को भ्रष्टाचार से मुक्त करने जैसे अहम कदमों पर मंत्रालय ने अहम कार्य किया है।

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इंटरनेट के दौर में ई.कॉमर्स से लेकर सामान्य बाजार तक उपभोक्ता को समुचित, व्यापक और सही दिशा में सहायता देने को लेकर मंत्रालय की भूमिका और उठाए जाने वाले कदमों समेत अन्य पहलुओं पर पीयूष पांडेय की उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों के मंत्री रामविलास पासवान से बातचीत। पेश हैं उसके मुख्य अंश:

प्रश्न- दोहरे अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर प्रतिबंध लगाने का फैसला उपभोक्ता मंत्रालय ने लिया था। लेकिन यह व्यवस्था समुचित तरीके से लागू नहीं हो रही है, इसके पीछे की क्या वजह है?
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रामविलास- दोहरे एमआरपी पर न्यायापालिका के आदेश के चलते प्रतिबंध लगाने के निर्णय में एक रुकावट आई। जैसे पानी की बोतल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि होटल के भीतर और बाहर दोहरी एमआरपी हो सकती है। इस आदेश के खिलाफ सरकार ने शीर्षस्थ अदालत के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है। हालांकि अन्य चीजों और सामग्री पर दोहरी एमआरपी नहीं रखने के सरकार के फैसले को जारी रखा गया। इस संबंध में विभिन्न कंपनियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं और इसे लागू किया जा रहा है ताकि आने वाले दिनों में दोहरी एमआरपी की गैरकानूनी गतिविधि पूरी तरह से समाप्त हो सके। उपभोक्ता इसके लिए सीधे मंत्रालय को शिकायत भेज सकते हैं। हमारा प्राथमिक मकसद उपभोक्ता संरक्षण हैं जिसके लिए हम तत्पर हैं।

ई-कमर्स कंपनी की अनुचित गतिविधियों पर रोक

प्रश्न- ई-कॉमर्स कंपनियों की उपभोक्ता के प्रति अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाया जा रहा है?

रामविलास- उपभोक्ता हितों को सर्वोपरि मानते हुए मंत्रालय ने बदलती बाजार प्रणाली के मद्देनजर बजट सत्र में एक विधेयक पेश किया गया था। इसमें ई-कॉमर्स को उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में लाकर उपभोक्ता हित को प्राथमिकता देना है। लेकिन सदन नहीं चलने की वजह से वह पारित नहीं हो सका। उम्मीद है कि आगामी सत्र में उसे मंजूरी मिल जाएगी। मंत्रालय ने इस मामले में हर उस पहलू पर विचार-विमर्श किया है जो उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ा है। इसमें उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को अधिकार दिया गया है कि वह समान खरीद या उसके बाद की विभिन्न परिस्थियों के दौरान उपभोक्ता की शिकायत का निवारण करेगा। उसे तत्काल कार्रवाई का अधिकार होगा और उसका एक विशेष जांच विंग होगा जिसका नेतृत्व महानिदेशक करेगा।

प्रश्न- गन्ना किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। क्या उनसे अन्नदाता को वाकई फायदा मिल रहा है?

पासवान- सरकार ने गन्ना किसानों से जुड़े हरेक पहलू पर कदम उठाया है। बकाया भुगतान हो या फिर उन्हें प्रति क्विंटल गन्ना पर सहायता मुहैया कराने से जुड़ा हो। बफर स्टॉक और चीनी का मूल्य निर्धारित करना भी उनमें से एक है। राजग सरकार में किसान प्राथमिक हैं, प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। इसके मद्देनजर कई कदम उठाए गए हैं और उठाए जा रहे हैं। उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों का मंत्रालय की जहां इसमें भूमिका है, वह निभा रहा है। किसानों को पैदावार और मेहनत के अनुपात में डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराने की घोषणा बजट में हुई थी। मौजूदा सरकार किसान और कृषि को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

प्रश्न- हॉलमार्किंग पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) एक्ट के नियम बदले गए हैं। इस व्यवस्था को अनिवार्य करने की घोषणा कब तक होगी?

रामविलास- बीआईएस के नियमों में हमने व्यापक स्तर पर पूरी चर्चा के बाद समुचित बदलाव किया है। हॉलमार्किंग का सबसे बड़ा फायदा सोने की खरीद करने वाले लोगों को मिलेगा। और देश में बड़े पैमाने पर लोग आभूषणों की खरीद करते हैं, उनके उचित मानक का सोना-चांदी मिल पाएगा। नियमों में बदलाव के बाद दूसरा चरण हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने का है। इस पर काम चल रहा है और थोड़े समय में इस संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी। इसे लागू करने के लिए सुनारों को छह से एक साल तक का समय मुहैया कराया जाएगा, क्योंकि मौजूदा समय ढांचागत सुविधाओं की कमी है। देश में 566 हॉलमार्किंग केंद्र हैं और सभी केंद्र मिलकर करीब 20 प्रतिशत औसत क्षमता पर परिचालन करते हैं। हॉलमार्किंग केंद्रों को स्थापित करने के लिए तमाम आवेदनों की समीक्षा की गई है। नए नियमों के तहत सुनारों को बीआईएस से लाइसेंस लेने की जरूरत होगी, जो करीब 25 हजार सर्राफ ले चुके हैं जबकि 10 बुलियन रिफाइनरीज ने लाइसेंस लिए हैं।
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पीडीएस का कंप्यूटरीकरण

प्रश्न- पीडीएस का कंप्यूटरीकरण चल रहा है, यह कब तक पूरा होगा?

रामविलास- एफसीआई का काम है कि वह अनाज लेकर राज्यों में पहुंचा दे। वहां के आगे राज्य सरकारों की गतिविधि शुरू होती है। जिस समय यह अधिनियम बन रहा था उस समय काफी बहस हुई थी कि जब पैसा केंद्र सरकार दे रही है तो यह केंद्र की निगरानी में होना चाहिए। लेकिन विरोध हुआ तो फिर यह तय हुआ कि अनाज खरीदना, भंडारण करना और भेजना केंद्र का काम, जबकि राज्य सरकारें लाभार्थी तय करना और उन तक अनाज पहुंचाती हैं। इसमें काफी भ्रष्टाचार था जिसके लिए पीडीएस व्यवस्था को कंप्यूटरीकृत करने का निर्णय लिया गया। अब तक राशन कार्ड को आधार से लिंक करने समेत अन्य काम भी चला और 12 करोड़ जाली राशन कार्ड निकले। और जो वास्तविक लाभार्थी थे, उन्हें जोड़ा गया। केंद्र पूरे देश में 81 करोड़ लोगों को खाद्य सामग्री छूट पर मुहैया करायी जा रही है। जबकि कुछ एक राज्य सरकारों को छोड़ दिया जाए तो वह इस योजना में कोई खर्च नहीं देती। इस व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है और राज्यों ने गतवर्ष दिसंबर तक कंप्यूटरीकरण का काम पूरा करने को कहा था। लेकिन अभी नहीं हुआ और उम्मीद है कि इस साल पूरा होगा।

प्रश्न- बड़े शब्दों में एक्सपायरी समेत अन्य जानकारी उत्पादों पर नहीं लिखी जा रही है। इस पर आपका क्या कहना है?

रामविलास- कंपनियां इस मामले में बहाना खोजती रहती हैं जैसे पुराना माल बिक रहा है। हालांकि मंत्रालय के सख्त निर्देशों के बाद एक्सपायरी समेत उपभोक्ता हित वाली चार जानकारी को उत्पाद के 40 प्रतिशत दायरे में दर्शाना शुरु किया गया है। कंपनियों को गत वर्ष दिसंबर तक इस व्यवस्था को लागू करने को कहा गया था और अब बड़े शब्दों में एक्सपायरी समेत अन्य जानकारियां देना कंपनियों ने शुरू कर दिया है। अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो कानून के तहत उसके खिलाफ कदम उठाया जाएगा।

प्रश्न- अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को सस्ता राशन मुहैया कराने की घोषणा आपने की थी। क्या अन्य जाति के गरीबों को इसके दायरे में शामिल किया जाएगा?

रामविलास- इसमें मंत्रालय की ओर से कहा गया कि जिस छात्रावास में दो.तिहाई छात्र एससी-एसटी और गरीब हैं। ऐसे छात्रों को सस्ता राशन सरकार की ओर से मुहैया कराया जाएगा। इसमें कोई जातिगत बंधन नहीं रखा गया है। ज्यादातर छात्र एससी-एसटी के होने का अनुमान है। इसी के चलते उन्हें घोषणा में प्राथमिकता दी गई।
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