स्नेहा इस शादी से बेहद खुश हैं और अपने लिए एक बेहतर भविष्य का सपना देख रही हैं। होने वाले पति शुभम ने भी उनके आगे बढ़ने में उनका पूरा साथ देने का वादा किया है। स्नेहा ने ‘पीरियडः द एंड ऑफ सेंटेंस’ फिल्म में अभिनय किया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
परिवार वालों की अगुवाई से हो रही इस शादी से दोनों परिवार बेहद खुश हैं। स्नेहा के पिता राजेंद्र सिंह पेशे से किसान हैं और किसानी ही परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। उनके दो भाई अरविंद और कपिल भी परिवार के साथ हैं। वहीं, सहारनपुर के शुभम पंवार जिनसे स्नेहा परिणय बंधन में बंध रही हैं, बीएससी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उनकी नौकरी लग चुकी है। वे काफी प्रगतिशील विचारों के आधुनिक युवा हैं जिन्हें पति के रूप में पाकर स्नेहा बेहद खुश हैं।
शुभ विवाह के इस अवसर पर अमर उजाला ने स्नेहा से बातचीत की। स्नेहा ने बताया कि इस फैसले से दोनों परिवार बहुत खुश हैं। ससुराल पक्ष में ससुर और सास सहित पूरे परिवार को उन पर गर्व है कि उनके जैसी बेटी उनके परिवार का अंग बन रही है। स्नेहा ने बताया कि उनके होने वाले पति शुभम पंवार ने उनको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है और कहा है कि उन्हें अभी और आगे बढ़ना है। वे उनके हर फैसले में उनके साथ खड़े हैं। पति के इस व्यवहार को देख स्नेहा बेहद खुश हैं।
ऑस्कर पुरस्कार मिलने के बाद भी स्नेहा की कठिनाइयां कम नहीं हुई थीं और इस तरह के शानदार प्रदर्शन के बाद भी उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा था। हालांकि, कुछ प्रयास के बाद उनकी जिंदगी व्यवस्थित हुई और अब वे आगे बढ़ रही हैं। स्नेहा और उनके कुछ दोस्तों ने मिलकर शौर्य शक्ति फॉउन्डेशन नाम से एक संगठन बना लिया है। इसके जरिए वे अब देश के गांवों को आगे बढ़ाने के लिए, महिलाओं और पर्यावरण के लिए काम कर रही हैं।
इसके लिए मिला ऑस्कर
महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानी को लेकर ‘पीरियडः द एंड ऑफ सेंटेंस’ नाम से एक डॉक्यूमेंटरी फिल्म बनाई गई थी। पांच अप्रैल 2018 में रिलीज हुई इस फिल्म को निर्देशक-प्रोड्यूसर रायका जेह्ताब्जी ने बनाया था। इस फिल्म को उन्होंने तमिलनाडु के पैडमैन कहे जाने वाले अरुणाचलम मुरुगनाथम के जीवन से प्रेरित होकर बनाया था जिन्होंने अपना पूरा जीवन महिलाओं को उनकी समस्याओं से मुक्ति दिलाने में लगा दिया। इस फिल्म को ऑस्कर पुरस्कार से नवाजा गया था। इसके साथ ही फिल्म को अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य पुरस्कार भी मिले थे।
इस फिल्म में स्नेहा और सुमन नाम की हापुड़ की दो बेटियों ने अभिनय किया था, जो उनके वास्तविक कार्य पर आधारित था। स्नेहा उस समय महिलाओं के लिए पैड्स बनाने वाली एक कंपनी के लिए काम करती थी। फिल्म के ऑस्कर पुरस्कार मिलने के बाद स्नेहा अचानक देश की बेटियों के आदर्श के तौर पर सामने आई थीं। उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी पुरस्कृत किया था।