केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के नियम 6 के अलावा अन्य कई नियमों में संशोधन किया है। संशोधित नियमों के तहत सरकार ने सरकारी सेवकों को विदेशों से फंड लेने पर रोक लगा दी है और एनजीओ के हर अधिकारी के लिए आधार अनिवार्य कर दिया है।
साथ ही विदेशों से फंड हासिल करने वाले संगठन ऐसे फंड के 20 फीसदी से ज्यादा की रकम का इस्तेमाल प्रशासनिक उद्देश्य के लिए नहीं कर सकेंगे। वर्ष 2020 से पहले यह सीमा 50 फीसदी थी। कानून के अनुसार, विदेशों से फंड हासिल करने वाले सभी एनजीओ को एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराना होगा।
बैंक खातों के बारे में गृह मंत्रालय को 45 दिन में बताना होगा
नियम 9 में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत अब व्यक्तियों या संगठनों या गैर सरकारी संगठनों को बैंक खाते के बारे में गृह मंत्रालय को सूचित करने का समय 45 दिन कर दिया गया है। इससे पहले यह समय सीमा 30 दिनों की थी। नियम 9 धन प्राप्त करने के लिए एफसीआरए के तहत ‘पंजीकरण‘ या ‘पूर्व अनुमति’ प्राप्त करने के आवेदन से संबंधित है।
मौजूदा प्रावधान का पालन जरूरी
अब एफसीआरए के तहत विदेशी धन हासिल करने वाले किसी भी व्यक्ति को प्राप्तियों पर खातों के लेखा परीक्षण विवरण को रखने के मौजूदा प्रावधान का पालन करना होगा और विदेशी योगदान का उपयोग करना होगा, जिसमें आय और व्यय विवरण, वार्षिक भुगतान रसीद शामिल है। नियम 17ए में 15 दिनों के लिए 45 दिन किया गया है।
विदेशों से फंड लेने वाले बैंक अकाउंट, नाम, पता या संगठन में बदलाव होने पर जानकारी देनी होती है। आखिरी संशोधन नियम 20 में किया गया है। ऑन अ प्लेन पेपर शब्द के लिए ‘ऐसे रूप और तरीके से, निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक रूप के साथ’ शब्दों को बदल दिया जाएगा।
देश के खिलाफ विदेशी धन के इस्तेमाल को रोकना मकसद
इन बदलावों का मकसद ऐसी गतिविधियों पर लगाम लगाना है जो विदेश फंड के जरिये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर रहे हैं। 1976 में बनाए गए एफसीआरए में अब तक कई संशोधन किए जा चुके हैं। पिछले कुछ समय में दिल्ली, असम दंगों समेत कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें एनजीओ द्वारा विदेश धन का इस्तेमाल देश के खिलाफ किया गया है। ऐसे में केंद्र सरकार ने इन नियमों में सख्त कर दिया है।