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OPS: 91 लाख कर्मियों से छिपाई जा रही NPS रिव्यू कमेटी की फाइल? कर्मचारी संगठनों ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 12 Sep 2024 12:45 PM IST

सार

केंद्र एवं राज्यों के कई बड़े कर्मचारी संगठनों ने यूपीएस को 'छलावा' करार दिया है। यूपीएस बनाम ओपीएस के इस दंगल में, सरकार के पक्ष में कम तो उसके खिलाफ ज्यादा कर्मचारी संगठन हैं।
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पेंशन स्कीम पर रार - फोटो : Amar Ujala

 

महाराष्ट्र में लंबे समय से ओपीएस की लड़ाई लड़ने वाले 'महाराष्ट्र राज्य जुनी पेंशन संघटना' के राज्य सोशल मीडिया प्रमुख विनायक चौथे के अनुसार, यूपीएस लागू करने वाली टीवी सोमनाथन कमेटी की रिपोर्ट देने से केंद्र सरकार ने इनकार कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं कर सकते। विनायक कहते हैं, आखिर इस रिपोर्ट में ऐसा क्या है, जिसे सरकारी कर्मचारियों से छिपाया जा रहा है। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में क्या दिक्कत है। पुरानी पेन्शन 'ओपीएस' को दरकिनार कर यूपीएस क्यों लाई गई है, यह बात सबको पता चलना चाहिए। बता दें कि विनायक चौथे ने 'सूचना का अधिकार अधिनियम' 2005 के तहत एनपीएस रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट की प्रति मांगी थी। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 10 सितंबर को उनकी आरटीआई का जवाब देते हुए लिखा, उक्त जानकारी सेक्शन 8 (1) (i) ऑफ आरटीआई एक्ट 2005 के अंतर्गत इस सूचना को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। आप यूपीएस के संबंधित जानकारी चाहते हैं तो पीआईबी की वेबसाइट पर जाएं। 




'नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत' के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल कहते हैं, इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में क्या हर्ज है। यह कमेटी, एनपीएस में सुधार के लिए बनी थी। अब इसकी रिपोर्ट को क्यों छिपाया जा रहा है। 30 सितंबर तक अगर यूपीएस का गजट नहीं आता है तो नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूपीएस-एनपीएस के विरोध में महा-आंदोलन होगा। दूसरी तरफ पुरानी पेंशन की मांग के लिए लंबे समय से आंदोलन करने वाले कर्मचारी संगठन 'एनएमओपीएस' ने भी 26 सितंबर को देश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।


एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने पिछले दिनों एनपीएस/यूपीएस के विरोध में दो सितंबर से छह सितंबर तक काली पट्टी बांधकर काम करने का आह्वान किया था। 


केंद्र एवं राज्यों के कई बड़े कर्मचारी संगठनों ने यूपीएस को 'छलावा' करार दिया है। यूपीएस बनाम ओपीएस के इस दंगल में, सरकार के पक्ष में कम तो उसके खिलाफ ज्यादा कर्मचारी संगठन हैं। पीएम की बैठक में शामिल 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' के अध्यक्ष रूपक सरकार कह चुके हैं, कि ओपीएस का संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। अभी हम यूपीएस का विस्तृत नोटिफिकेशन आने का इंतजार कर रहे हैं। नोटिफिकेशन में बहुत सी बातें क्लीयर होंगी। हालांकि ओपीएस की मांग जारी रहेगी। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार बताते हैं, ओपीएस का आंदोलन दोबारा से शुरु होगा। इस बाबत राजनीतिक दलों के नेताओं से बात हो रही है। 


नई पेंशन योजना 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (यूपीएस) के विरोध में अब केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान भी सामने आ रहे हैं। वजह, उन्हें तो ओपीएस भी नहीं मिलती। 'पुरानी पेंशन बहाली' का केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इन बलों को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' मानकर ओपीएस में शामिल करने के लिए कहा था, मगर केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। अब यूपीएस के प्रावधानों से इन बलों के जवानों की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है। वजह, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सिपाही 'जीडी' के लिए ज्यादातर नियुक्तियां 18 से 20 वर्ष की आयु में हो जाती हैं। यूपीएस के तहत उन्हें अब 25 साल की सेवा में वीआरएस मिलेगी। अगर वे 45 साल की आयु में वीआरएस लेते हैं तो उनकी मासिक पेंशन 60 वर्ष की आयु में शुरु होगी। ऐसे में 15 वर्ष तक परिवार का गुजारा कैसे होगा। 

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