होली की छुट्टी के बाद फिर शुरू हुए बजट सत्र की शेष अवधि के दौरान संसद का चलना मुश्किल दिख रहा है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही जगह विपक्ष ने एक स्वर से नीरव मोदी मामले पर चर्चा न होने तक संसद ठप रखने का फैसला किया है। यह फैसला बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक के दौरान सत्ता पक्ष को बता दिया गया है।
दरअसल, विपक्ष राज्यसभा में पंजाब नेशनल बैंक घोटाले पर बहस के बाद वोटिंग चाहता है। चूंकि सत्ताधारी एनडीए अभी भी राज्यसभा में बहुमत में नहीं है, इसलिए वह वोटिंग से बचना चाहता है।
पीएनबी घोटाले और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे के बहाने तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद भी सोमवार को जमीन पर उतरती दिखाई दी जब लगभग सभी गैर-कांग्रेस और गैर-भाजपा पार्टियों ने संसद के अंदर तालमेल पर सहमति जताई। आंध्र में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार चला रही तेलगू देशम पार्टी के सांसदों ने दूसरे विपक्षी दलों से मुलाकात कर सहयोग मांगा। तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लोकसभा में नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने टीडीपी के लोकसभा सांसदों और राज्यसभा में तृणमूल पार्टी के नेता डेरेक ओ’ब्रॉयन से मुलाकात की। टीडीपी के राज्यसभा सांसदों को समर्थन का आश्वासन दिया है।
कांग्रेस का हाथ, बाहर से साथ
साथ ही, तेलंगाना राष्ट्र पार्टी, अन्ना डीएमके, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी तीसरे मोर्चे के गठन में दिलचस्पी दिखाई। इनमें से अधिकतर पार्टियां अपने-अपने राज्यों में कांग्रेस से लड़ती हैं, इसलिए वे चाहती हैं कि बीजेपी के खिलाफ बन रहे मोर्चे को कांग्रेस का समर्थन तो रहे लेकिन बाहर से। यही वजह है कि राज्यसभा में तालमेल के लिए विपक्षी दलों के बीच होने वाली बैठक से भी सोमवार को कांग्रेस को बाहर रखा गया। सामान्यतया संसद सत्र के दौरान हर दिन यह बैठक कांग्रेस के नेतृत्व में ही आयोजित होती थी।
एनडीए घटक भी तीसरे मोर्चे में?
मजे की बात है कि तीसरे मोर्चे में एनडीए के भी कई घटक शामिल होने के इच्छुक हैं। टीडीपी के अलावा शिव सेना ने भी सकारात्मक रुख दिखाया है। पिछले दिनों शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फोन पर ममता बनर्जी से लगभग दस मिनट बात की थी। वहीं, ममता ने डीएमके नेता स्टालिन और टीआरएस नेता के चंद्रशेखर राव से भी करीब 12 मिनट बात की है।