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महिला आरक्षण: 'जनगणना से पहले लागू नहीं हो सकता विधेयक, तो विशेष सत्र बुलाने का क्या मतलब,' विपक्ष का सवाल

Wed, 20 Sep 2023 05:15 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विपक्षी दलों राकांपा और सपा ने बुधवार को महिला आरक्षण विधेयक में ओबीसी के लिए कोटा की मांग की और पूछा कि जब जनगणना और परिसीमन से पहले विधेयक को लागू नहीं किया जा सकता है तो विशेष सत्र बुलाने का क्या कारण है। 
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राकांपा सांसद सुप्रिया सुले - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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विपक्षी दलों राकांपा और सपा ने बुधवार को महिला आरक्षण विधेयक में ओबीसी के लिए कोटा की मांग की और पूछा कि जब जनगणना और परिसीमन से पहले विधेयक को लागू नहीं किया जा सकता है तो विशेष सत्र बुलाने का क्या कारण है। 

 

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लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले ने इस कानून को 'पोस्ट डेटेड चेक' बताया और मांग की कि सरकार इसे लागू करने की तारीख और समयसीमा बताए। सुले ने 128वें संविधान संशोधन विधेयक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को मंजूरी देने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को लेकर सवाल उठाया जबकि जनगणना और परिसीमन के बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता।
 

उन्होंने जोर देकर कहा कि चूंकि जनगणना और परिसीमन की तारीख अभी तय नहीं हुई है, इसलिए विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में भी पेश किया जा सकता था। 
 

उन्होंने कहा, 'देश में सूखा है। इस विशेष सत्र में सूखे पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? सरकार से मेरा सवाल है कि अगली जनगणना की तारीख क्या है... परिसीमन की तारीख अनिश्चित है। अत, (महिला) आरक्षण विधेयक जो दो अनिश्चित तिथियों पर निर्भर है, हम उसे कैसे प्राप्त करेंगे? जनगणना या परिसीमन के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है, इसके लिए तारीख और समय सीमा क्या है।'
 

भाजपा द्वारा निशिकांत दुबे को चर्चा के मुख्य वक्ता के रूप में मैदान में उतारने पर सुले ने कहा कि उन्हें लगता है कि भाजपा 'अग्रिम जमानत' ले रही है क्योंकि दुबे ने वही सवाल उठाए जो विपक्ष ने कल पूछे थे। उन्होंने कहा, 'हमें ओबीसी आरक्षण की मांग क्यों नहीं करनी चाहिए? यह एक सुनहरा अवसर है... बड़े दिल से विशेष सत्र में एससी, एसटी, ओबीसी के लिए संविधान संशोधन करते हैं। आइए देश को एक संदेश भेजें कि हम एससी, एसटी और ओबीसी के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें गलत क्या है? अगर उनका नजरिया अलग है तो भाजपा को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।'
 

समाजवादी पार्टी की सदस्य डिंपल यादव ने विधेयक में पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करने की मांग की।
 

वहीं, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की नेता हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा में सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा हमला बोला और उस पर महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक लाकर देश की महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। संविधान संशोधन विधेयक - नारीशक्ति वंदन अधिनियम-2023 पर चर्चा में भाग लेते हुए  उन्होंने कहा, 'आप घंटों में नोटबंदी कर सकते हैं, जीएसटी पारित कर सकते हैं, आप महिला आरक्षण विधेयक को लागू क्यों नहीं कर सकते...?' 
 
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बादल ने गुजरात में बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को सजा में छूट दिए जाने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए अपने नेताओं पर मामला दर्ज किए जाने को लेकर भी सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'पिछले पांच साल में महिलाओं के खिलाफ अपराध में 26 फीसदी की वृद्धि हुई है। यही कारण है कि मणिपुर जैसी घटना होती है और सरकार अपना मुंह तभी खोलती है जब अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है।
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