कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने गुरुवार को संसद का बजट सत्र संपन्न होने के बाद संसद भवन से विजय चौक तक 'तिरंगा मार्च' निकाला। कांग्रेस के अलावा द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक), समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) जैसे समान विचारधारा वाले विपक्षी और वाम दलों के सांसदों ने सुबह करीब 11.30 बजे मार्च शुरू किया।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि यह तय किया गया है कि संसद से विजय चौक तक तिरंगा मार्च निकाला जाएगा, जहां विपक्षी सांसद प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और बजट सत्र के दौरान जो कुछ हुआ उसे लोगों के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने भविष्य में भी समन्वय और सहयोग करने का फैसला किया है।
कांग्रेस महासचिव संगठन के सी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि बजट सत्र का पूरा दूसरा भाग केवल सरकार के रवैये के कारण धुल गया। पहली बार सत्ता पक्ष ने कार्यवाही ठप कर दी और बाद में उन्होंने अदाणी मुद्दे पर चर्चा करने से इनकार कर दिया और यह भी नहीं सुना कि विपक्ष क्यों मांग कर रहा है...
कई विपक्षी दलों के नेताओं ने बुधवार को संसद में राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे के कक्ष में बैठक कर बैठक की थी। बैठक में कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), टीएमसी, आप, जेडीयू, सीपीआई, सीपीएम, आरजेडी, जेएमएम, आएसपी और आईयूएमएल के नेताओं ने भाग लिया था। बाद में कांग्रेस सांसदों ने कांग्रेस संसदीय दल के कार्यालय में बैठक की और अपनी रणनीति पर चर्चा की थी।
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 13 मार्च को शुरू हुआ था लेकिन शुरू होने के बाद से ही संसद की कार्यवाही नहीं चल पाई। दरअसल विपक्ष जहां अदाणी मामले पर जेपीसी के गठन की मांग पर अड़ा रहा। वहीं सत्ता पक्ष राहुल गांधी के लंदन में दिए बयान पर माफी की मांग पर अड़ा रहा। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही नहीं चल पाई। इसके बाद राहुल गांधी के मानहानि मामले में संसद सदस्यता जाने के बाद कांग्रेस सरकार पर और हमलावर हो गई। यही वजह है कि बजट सत्र का दूसरा चरण हंगामे की भेंट चढ़ गया।