कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "यह सच है कि पुलिस वालों ने मुझे थोड़ा घसीटा, लेकिन वे मेरे कान में फुसफुसा रहे थे, 'इस सरकार को हटाओ।' एक ने कहा, 'मैं राजस्थान से हूं, इन्हें हटाओ। हम तो बस वर्दी पहने हुए हैं।' दूसरे ने कहा, 'मैं हरियाणा से हूं; इन्हें हटाओ।'"
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से तीन मांगें की हैं। इनमें से पहली मांग है- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो। दूसरी मांग है कि छात्रों से हमला करने वालों को दोषी ठहराया जाए। तीसरी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक से देश के 7.5 करोड़ छात्रों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि 152 पेपर लीक के मामलों में एक भी दोषी को सजा नहीं मिली है। उन्होंने कहा, "छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। वे सिर्फ अपनी मांगें रख रहे हैं. वे वही मांग रहे हैं, जिसका इस देश के छात्र होने के नाते उन्हें अधिकार है. वे कोई अपराध नहीं कर रहे हैं। वे सिर्फ इतना कह रहे हैं कि हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहिए जो ठीक से काम करे, जो निष्पक्ष हो. लेकिन आज हमारे पास ऐसी व्यवस्था नहीं है." राहुल गांधी ने कहा "हर किसी के लिए यह साफ है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, जिसे कभी दुनिया की सबसे बेहतरीन शिक्षा प्रणालियों में गिना जाता था, आज गंभीर संकट का सामना कर रही है."
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 20 जुलाई के सीजेपी के संसद चलो मार्च के दौरान छात्रों के प्रदर्शन के वीडियो चलाए। इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों ने छात्रों को बुरी तरह पीटा। उन्होंने कहा, "सवाल यह है कि हमारे छात्रों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? आखिर हमारे छात्रों ने ऐसा क्या किया है? हजारों-हजार छात्र हैं, उन्होंने ऐसा कौन-सा अपराध किया है कि उन पर सुरक्षा बल हथियार तानें, उन्हें पीटा जाए, उनके साथ मारपीट की जाए और उनका अपमान किया जाए?"
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की आज शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस होनी है। जानकारी के अनुसार, छात्रों के आंदोलन और कांग्रेस के प्रदर्शन में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के खिलाफ ये प्रेस कॉन्फ्रेंस हो सकती है।
नीट पेपर लीक मामले को लेकर नई दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार को चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
वीडी सतीशन ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर नई दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कई नेताओं और सांसदों को पुलिस ने जबरन हटाया और उनके साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया। सतीशन ने कहा कि इससे एक दिन पहले छात्रों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट विवाद के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या की, लेकिन केंद्र सरकार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह निंदनीय है। छात्रों को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन जारी रहेगा।
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि कथित नीट परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा आंदोलन लगातार मजबूत हो रहा है और उसे जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। विजयन ने आरोप लगाया कि पहले वामपंथी छात्र संगठनों ने इस आंदोलन का समर्थन किया था, जिसके बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल भी इसमें शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों का जवाब देने के बजाय केंद्र सरकार बल प्रयोग कर आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। विजयन ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पुलिस के साथ लाठीधारी लोगों ने भी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि दमन से आंदोलन कमजोर नहीं होगा, बल्कि उसे और अधिक जनसमर्थन मिलेगा। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और नीट पेपर लीक के खिलाफ संसद परिसर में धरने पर बैठे हैं। इस दौरान उन्होंने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर लिखा 'बारिश की हर बूंद स्वीकार्य है, लेकिन निर्दोषों पर अन्याय नहीं। अन्याय करने वाले चाहे कितने भी ताकतवर क्यों न हों, या उनके पीछे कितनी भी बड़ी ताकत क्यों न हो। उन्हें इसके लिए जवाब देना ही होगा। महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताकत हैं। जय भीम, जय भारत।'
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, 'अगर कोई विरोध करता है, तो सरकार का फर्ज है कि वह उनसे जाकर बात करे और उनकी बात सुने। अगर उन्हें कोई गलतफहमी है, तो सरकार का काम है उसे दूर करना, और इस सरकार ने ऐसा नहीं किया। अगर वे पहले ही दिन उनसे बात कर लेते, तो मामला इतना नहीं बढ़ता। जैसे हमने मुंबई में विरोध किया, वैसे ही हम और भी विरोध करेंगे। लोकतंत्र में बातचीत ही होती है। वरना, इसे तानाशाही कहा जा सकता है।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा कहते हैं, 'हमारे सभी सांसद विरोध जताने के लिए काले कपड़े पहनेंगे। यह विरोध इस बात के लिए है कि दिल्ली में इस देश के छात्रों के साथ क्या किया गया, धर्मेंद्र प्रधान के अपने पद पर बने रहने की जिद के खिलाफ, और छात्रों के असंतोष पर सरकार के रवैये के खिलाफ। वे यह भी कहते हैं, 'हमारे विरोध का मकसद युवाओं के हितों की रक्षा करना है। भाजपा के विरोध का मकसद धर्मेंद्र प्रधान को बचाना है।' इसके साथ ही विरोध प्रदर्शन पर वे कहते हैं, 'इसका संदेश युवाओं के लिए है कि हम आपके साथ हैं। निराश या हताश न हों। कांग्रेस, राहुल गांधी और उनका हर सिपाही इस देश के युवाओं के साथ खड़ा है।'
कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर राजद सांसद संजय यादव ने कहा, 'इस सरकार के कार्यकाल में देश भर में 150 से ज्यादा पेपर लीक हुए हैं। कोई भी परीक्षा पारदर्शी तरीके से नहीं कराई गई है। पिछले 50 वर्षों में बेरोजगारी सबसे ज्यादा है। सरकार बेरोजगारी और पेपर लीक पर बात करने के बजाय अपनी तारीफ क्यों करती है? कि वे 85 करोड़ भारतीयों को जिंदा रहने के लिए 5 किलो राशन देते हैं। दूसरी ओर, आपकी गलत नीतियों और फैसलों की वजह से करोड़ों छात्र और युवा बेरोजगार हैं। वे आज सड़कों पर हैं। लेकिन आप उन पर ज़ुल्म करते हैं। आप अपनी गलतियां नहीं मानते।'
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह हताशा की हद है। राहुल गांधी के पास कोई मुद्दा नहीं है और वे सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए नाटक कर रहे हैं। मेरा मानना है कि किसी भी विपक्षी पार्टी ने कभी ऐसा कुछ करने की कोशिश नहीं की। हम भी विरोध करेंगे। आज हम पूरे भारत में कांग्रेस के अलग-अलग दफ्तरों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे'।
आप सांसद संजय सिंह के बयान पर वे कहते हैं, 'विपक्ष के पास कोई ठोस सोच नहीं है। उन्होंने अलग-अलग राय रखने वाले लोगों को मिलाकर 'INDIA' गठबंधन बनाया है, इसलिए वे एक-दूसरे पर आरोप लगाएंगे और नाटक करेंगे'।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के ट्वीट पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, 'शिक्षा मंत्री के तौर पर बने रहने की उनकी कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती। अब उनकी बात कौन सुनेगा? उनकी नैतिक जिम्मेदारी कहां है? 1.4 अरब लोग उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। देश के बच्चों को बचाने के लिए उन्हें इस्तीफा देना ही होगा।'
समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने कहा 'अगर यह सरकार चर्चा करती, तो क्या कोई हंगामा होता? वे कोई चर्चा नहीं करना चाहते। अगर कोई कुछ कहने के लिए खड़ा होता है, तो सदन स्थगित कर दिया जाता है। यह लोकतंत्र का मजाक है। विपक्ष एकजुट है। वे सब एक हैं। वे (राम मंदिर विवाद पर) कुछ नहीं कह रहे हैं। इससे बड़ा पाप और कोई नहीं हो सकता। एक भी दिन ऐसा नहीं बीतता जब चोरी न हुई हो; कोई हिसाब-किताब नहीं है।' वहीं, कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर डीएमके सांसद ए. राजा ने कहा, 'हर किसी को लड़ने का अधिकार है।'
विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी समेत कई अन्य नेता मौजूद थे।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को कहा कि छात्रों की मांगें जायज हैं। वे अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में कुछ भी अलोकतांत्रिक नहीं है। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और संसद में जो हो रहा है वह अलोकतांत्रिक है।
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'छात्रों का संघर्ष वास्तविक है और वे बदलाव की मांग कर रहे हैं। कागजात बार-बार लीक हो रहे हैं। कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि छात्र जायज चिंताएं उठा रहे हैं और उन्होंने फंड के आवंटन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे साथ जो हुआ वह अप्रासंगिक है। आप (मीडिया) मुझे बताएं कि छात्रों के साथ जो हुआ वह सही है या गलत? छात्रों की मांगें जायज हैं और वे अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। शिक्षा का बजट 14 लाख करोड़ रुपये है, लेकिन आप अडानी और अंबानी के 16 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर रहे हैं।'
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि, 'विपक्षी पार्टियों के सभी सांसद आज 'काले' कपड़े पहनकर आएंगे और छात्रों व सांसदों के खिलाफ पुलिस के इस्तेमाल के विरोध में 'काला दिवस' मनाएंगे। हम चाहते हैं कि सरकार छात्रों से बातचीत करे और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव करे'।
#WATCH | Congress MP Syed Naseer Hussain says, "All MPs of the Opposition parties will come dressed in 'black' clothes today and observe a 'Black Day' in protest over the use of police against the students and the MPs. We want the government to have dialogue with the students and… pic.twitter.com/V1QYMjU8KB
— ANI (@ANI) July 22, 2026
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, 'बेशर्मी की भी एक हद होती है। 20 जुलाई को लाठीचार्ज हुआ और कल हमने विरोध किया, तो अगर छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ... बिना नेम टैग वाले लोग अंदर आते हैं और हमला करते हैं, और विपक्ष के नेता या विपक्ष बस बैठे रहते हैं और हमारी आवाज नहीं उठाते?... आप कह रहे हैं कि हम छात्रों की भावनाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं'।
#WATCH | Delhi: Congress MP Pramod Tiwari says, "There is a limit to shamelessness. A lathi charge happened on 20 July, and yesterday we protested, so if a lathi charge was used against students... People without name tags enter, and attack, and the LoP or the opposition just… pic.twitter.com/8OUWwK6HrD
— ANI (@ANI) July 22, 2026
दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि 20 जुलाई को संसद तक सीजेपी मार्च के दौरान हिंसा हुई थी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पत्थरों और अन्य चीजों से पुलिसकर्मियों पर हमला किया, पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पुलिस और अन्य सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और बड़े स्तर पर हिंसा की। इससे कानून व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन कर रहे पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।
पुलिस ने बताया कि इस घटना में वरिष्ठ अधिकारियों समेत 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। अधिकारियों ने कहा कि हिंसक भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया और करीब 15 से 20 सरकारी वाहनों समेत अन्य सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ की।
इस बीच, मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कई राज्यों में प्रदर्शन किए। ये प्रदर्शन दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के अन्य नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में किए गए। इसके साथ ही सोमवार को सीजेपी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की गई।
तिरुवनंतपुरम, गुवाहाटी, जबलपुर और भुवनेश्वर में प्रदर्शन किए गए। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को दबा रही है। तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस और केरलम स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया।
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने बुधवार को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। इसमें उन्होंने संसद के पास प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग की। कांग्रेस सांसद ने अपने नोटिस में कहा कि जो छात्र कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से न्याय की मांग कर रहे हैं, उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा और गैरकानूनी बल का इस्तेमाल किया।
उन्होंने लिखा, इन घटनाओं से भारत के संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इनमें बोलने की आजादी, शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल हैं। जिस तरह से प्रदर्शन को संभाला गया, उससे देश की अंतरात्मा को झटका लगा है और यह उन लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, जिन्हें संसद बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
एर्नाकुलम से सांसद हिबी ईडन ने कहा कि सदन हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की परेशान करने वाली खबरों का 'मूक दर्शक' नहीं बना रह सकता। ये छात्र देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में कमियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
विपक्षी सांसद बुधवार को संसद के मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे। प्रदर्शन का समय सुबह 10:30 बजे तय किया गया है। इस दौरान विपक्षी सांसद नीट यूजी परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर करेंगे। इसके अलावा वे 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में भी प्रदर्शन करेंगे।